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Hindenburg Report: हिंडेनबर्ग रिपोर्ट ने फिर से खड़ा किया हंगामा; सेबी की साख पर उठाए सवाल

Sun, 11 Aug 2024 06:07 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 11 Aug 2024 06:07 PM IST
सार

सेबी चीफ माधबी पुरी बुच ने हिंडनबर्ग के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने अपने पति के साथ एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि उनका जीवन एक खुली किताब की तरह है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।

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Hindenburg report again created uproar; raised questions on SEBI's credibility
Hindenburg research - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिंडनबर्ग की एक और रिपोर्ट ने भारत में एक बार फिर हंगामा खड़ा कर दिया है। इस बार उसका निशाना सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच हैं। हिंडनबर्ग ने 10 अगस्त को एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति ने मॉरीशस की उसी ऑफशोर कंपनी में निवेश किया है, जिसके माध्यम से भारत में अडानी ग्रुप की कंपनियों में निवेश करवाकर अदाणी ने लाभ उठाया था। इसे व्यापार का गलत तरीका माना जाता है। हिंडनबर्ग का आरोप है कि उसने जनवरी 2023 में अडानी ग्रुप पर जो खुलासा किया था, उस पर सेबी ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। उसका आरोप है कि यह जांच केवल इसलिए नहीं की गई क्योंकि सेबी प्रमुख और अडानी ग्रुप के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

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जेपीसी का हो गठन: कांग्रेस
यह रिपोर्ट सामने आते ही भारत में राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक लिखित बयान जारी कर आरोप लगाया है कि 2018 में सेबी ने अंतिम लाभकारी व्यक्ति की जानकारी देने संबंधित नियमों को कमजोर कर दिया था, जिसके कारण इस तरह के घोटाले को अंजाम देना संभव हो सका। पार्टी के अनुसार, अडानी ग्रुप से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद लोगों की भारी रकम शेयर बाजार में डूब गई। इसके बाद सेबी ने 28 जून 2023 को इन नियमों को दोबारा लागू कर दिया। 
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कांग्रेस नेता ने कहा है कि सेबी ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। इन मामलों की सच्चाई लाने के लिए जेपीसी का गठन किया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में प्रधानमंत्री का इस्तीफा तक मांग लिया है। 
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देश को अस्थिर करने की साजिश: भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के समय को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि हर बार संसद सत्र से ठीक पहले विदेश से एक रिपोर्ट जारी कर दी जाती है। अडानी मामले पर हिंडनबर्ग की पहली रिपोर्ट भी संसद की बैठक से ठीक पहले जारी की गई थी। 

त्रिवेदी के अनुसार, इसको आधार बनाकर विपक्ष संसद में हंगामा खड़ा करता है। इस बार भी यह रिपोर्ट संसद सत्र के दौरान ही लाया जाना था, लेकिन उस दौरान इसे नहीं लाया गया इससे विपक्ष बौखला गया है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। 

सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि देश को जानबूझकर अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। विशेषकर आर्थिक तौर पर विवाद खड़ा कर देश के विकास को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। जिस समय दुनिया के तमाम विकसित देश महंगाई से कड़ा संघर्ष कर रहे हैं, भारत लगातार प्रगति कर रहा है। 

अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं आईएमएफ और विश्व बैंक तक ने अगले वित्तीय वर्ष में भी भारत के सात फीसदी के आसपास की गति से लगातार आगे बढ़ने की उम्मीद जाहिर की है। ऐसे में भाजपा नेता ने आशंका जाहिर की है कि भारत के विकास को जानबूझकर एक साजिश के तहत कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। 

वहीं, सेबी चीफ माधबी पुरी बुच ने हिंडनबर्ग के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने अपने पति के साथ एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि उनका जीवन एक खुली किताब की तरह है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने अपनी सभी आर्थिक जानकारियां किसी भी मंच पर देने के लिए भी तैयार रहने के लिए कहा है।  


हालांकि, दोनों पक्षों के इन दावों के बीच अब इस मामले पर राजनीति गर्म होने की पूरी संभावना है। विपक्ष के सभी प्रमुख दलों ने हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट के सहारे केंद्र सरकार को घेरने का काम किया है।

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