फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Health insurance policy has become a big need today

Health Insurance: स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आज बड़ी जरूरत, बारीकियों को समझलें नहीं तो उठाना पड़ सकता है नुकसान

Mon, 20 Mar 2023 05:03 AM IST
Jeet Kumar कालीचरण, नई दिल्ली।
कालीचरण, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 20 Mar 2023 05:03 AM IST
विज्ञापन
सार
भर्ती होने के दौरान आपके इलाज पर होने वाले कुल खर्च में कमरे के किराये की बड़ी भूमिका होती है। अगर किराया आपकी पॉलिसी में तय लिमिट से ज्यादा हुआ तो एक समान इलाज के लिए अधिक बिल चुकाना पड़ सकता है।
loader
Health insurance policy has become a big need today
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आज बड़ी जरूरत बन गई है। यह आपात मेडिकल स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने से लेकर इलाज और दवाइयों पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों से बचाता है। स्पष्ट शब्दों में कहें तो यह पूरा खर्च पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी वहन करती है।



हालांकि, पॉलिसीधारकों को कई बार स्वास्थ्य बीमा उत्पादों की विभिन्न बारीकियों की जानकारी नहीं होती है। इससे कई बार मेडिक्लेम में दिक्कतें आती हैं। इन बारीकियों में से एक है...अस्पताल के कमरे का किराया यानी रूम रेंट कैपिंग। 


भर्ती होने के दौरान आपके इलाज पर होने वाले कुल खर्च में कमरे के किराये की बड़ी भूमिका होती है। अगर किराया आपकी पॉलिसी में तय लिमिट से ज्यादा हुआ तो एक समान इलाज के लिए अधिक बिल चुकाना पड़ सकता है।

01% तक होती है किराये की सीमा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी राशि की


क्या है रूम रेंट कैपिंग
रूम रेंट कैपिंग या कमरे के किराये की कैपिंग वह लिमिट है, जो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत बीमा कंपनियां पॉलिसीधारक के अस्पताल में भर्ती होने पर कमरे के किराये के लिए वहन करती हैं। आमतौर पर किराये की लिमिट पॉलिसी रकम की एक फीसदी तक होती है। अगर आपकी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी 5 लाख रुपये की है तो अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा कंपनी कमरे के किराये के लिए प्रतिदिन अधिकतम 5,000 रुपये (एक फीसदी) का ही भुगतान करेगी।

किराया अधिक तो बढ़ता जाता है खर्च
कमरे का किराया पॉलिसी में तय लिमिट से अधिक होने पर बीमा कंपनियां क्लेम के निपटान के दौरान 'आनुपातिक कटौती' नामक अवधारणा का सहारा लेती हैं। इसके मुताबिक, बीमा कंपनी इलाज से जुड़े सभी संबंधित खर्चों से उसी अनुपात में कटौती करेगी, जिस अनुपात में कमरे का किराया तय लिमिट से ज्यादा है। इसे रूम रेंट को-पे कहा जाता है।

  • दरअसल, अस्पताल के कई शुल्क जैसे डॉक्टर का दौरा, ऑपरेशन शुल्क या जांच शुल्क सीधे कमरे के किराये से जुड़े होते हैं।
  • चुने हुए कमरे की श्रेणी के हिसाब से एक ही इलाज के लिए ये सभी शुल्क अलग-अलग हो सकते हैं।
  • ट्विन शेयरिंग कमरे के लिए एक सर्जरी की लागत 15,000 रुपये है तो सिंगल एसी कमरे में रहने पर उसकी लागत 20,000 रुपये हो सकती है। सुुइट कमरे के लिए लागत एक लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

ऐसे खत्म कर सकते हैं कैपिंग का झंझट
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदते समय रूम रेंट कैपिंग से जुड़े नियमों और शर्तों की पूरी जानकारी लेनी चाहिए। इससे क्लेम में परेशानी नहीं होती है। कुछ बीमा कंपनियां एड-ऑन के रूप में 'रूम रेंट को-पे वेवर' ऑफर करती हैं। मामूली अतिरिक्त प्रीमियम भरकर पॉलिसी में कमरे के किराये की कैपिंग को हटाया जा सकता है। -भास्कर नेरुरकर, प्रमुख हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस

ऐसे समझें पूरा गणित...
मान लीजिए, आपके पास 3 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है और रूम रेंट कैपिंग एक फीसदी यानी 3,000 रुपये है। लेकिन, जानकारी के अभाव में आपने 4,000 रुपये प्रतिदिन किराया वाला कमरा ले लिया। आपकी सर्जरी हुई और आप तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। तीन दिन के हिसाब से किराया पर कुल खर्च 12,000 रुपये आया, लेकिन बीमा कंपनी 3,000 रुपये के हिसाब से सिर्फ 9,000 रुपये ही चुकाएगी। अतिरिक्त 3,000 रुपये का भुगतान आपको अपनी जेब से करना होगा।

  • मामला यहीं खत्म नहीं होता। इस सूरत में इलाज खर्चों पर आनुपातिक कटौती 75% (किराये की सीमा/वास्तविक किराया x 100) लागू हो जाएगी।
  • ऐसे में अगर सर्जरी की लागत 50,000 रुपये है तो आनुपातिक कटौती के बाद यह घटकर 37,500 रुपये रह जाएगी। यानी बीमा कंपनी सिर्फ 37,000 रुपये का ही भुगतान करेगी।
  • इसी तरह, अन्य खर्चों में भी कटौती होती जाएगी। हालांकि, दवाओं पर कोई आनुपातिक कटौती नहीं होती है क्योंकि ये एमआरपी पर बिकती हैं और संबंधित इलाज खर्च का हिस्सा नहीं होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed