Manmohan Singh: भारत में आर्थिक सुधारों के वास्तुकार थे मनमोहन सिंह, विशेषज्ञों ने पूर्व पीएम को ऐसे किया याद
Manmohan Singh: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय सुधारों के वास्तुकार के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने भारतीय पूंजी बाजार, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश और आज का शेयर बाजार जो मूलत: उनकी (मनमोहन सिंह) की देन है उसके लिए वे आगे आए और भारतीय अर्थव्यवस्था को नया आकार दिया। आइए जानते हैं बाजार के विश्लेषकों ने पूर्व पीएम के निधन के बाद उन्हें कैसे याद किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय सुधारों के वास्तुकार के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। बाजार के विश्लेषकों को कहना है कि वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने भारतीय पूंजी बाजार, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश और आज का शेयर बाजार जो मूलत: उनकी की देन है, उसके लिए वे आगे आए और भारतीय अर्थव्यवस्था को नया आकार दिया। सिंह ने प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में जून 1991 से मई 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। इस अवधि के दौरान, उन्होंने परिवर्तनकारी आर्थिक सुधारों का नेतृत्व किया। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया, इसे वैश्विक बाजारों के लिए खोला और निजीकरण व वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया। बाद में, उन्होंने मई 2004 से मई 2014 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की।
सेबी की स्थापना और सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश करने वाले पहले व्यक्ति
सीएनएन रिसर्च के ओपी ओतस्वाल का कहना है कि आज का बाजार पूर्व प्रधानमंत्री महनमोहन सिंह की देन है। उन्होंने बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति विनियम बोर्ड (सेबी ) की स्थापन की जो आज भारतीय पूंजी बाजार में एक प्रमुख संस्था है। वे सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश करने वाले पहले प्रधानमंत्री थे यह आज वैश्विक बाजार का प्रतिनिधत्व कर रहा है। इससे पहले भारतीय बाजारों को लेकर सरकारों ने कोई भी नीति नहीं बनाई थी। उनके द्वारा लाइसेसिंग और पूंजीगत लाभ, कराधान के कई चीजों पर काम किया। हम हमेंशा उन्हें भारतीय सुधारों के वास्तुकार के रूप में जानेगे और आज का बाजार मूलतः उन्हीं की देन है।
भारत को उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर खड़ा किया
केयरएज के पवन सिंह कहते हैं कि मनमोहन सिंह को भारत के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक माना जाता है। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए और उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति हासिल की। 1991 में उन्होंने ने अपने साहसिक सुधारों से भारत को उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर खड़ा किया। शेयर मार्केट और रेग्युलेटर्स की स्थापना में बहुत बड़ा योगदान दिया। उनके सुधारों और भविष्य के लिए उनकी पैनी नजर को मार्केट हमेशा याद रखेगा।
आर्थिक संकट हल करने वाले प्रधानमंत्री
पीएल सिक्यूरटीज के राज वैद्य का कहना है कि बाजार के दिग्गज इस बात को नकार नहीं सकते कि आज का बाजार उनकी देन है। उन्हें 1991 के आर्थिक संकट को प्रभावी ढंग से संबोधित करने का श्रेय दिया जाता है। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने परिवर्तनकारी आर्थिक सुधारों का नेतृत्व किया, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया, इसे वैश्विक बाजारों के लिए खोला और निजीकरण और वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया। जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के के साथ जून 1991 से मई 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया तब उन्होंने निवेशकों को लिए अच्छा धन उत्पन्न किया था।
लाइसेंस राज समाप्त होने से स्टॉक एक्सचेंचों पर कंपनियों की लिस्टिंग में आई तेजी
बाजार के एक्सपर्ट कहते हैं 1991 में देश में लाइसेंस राज को समाप्त करके उन्होंने निजी उद्यमों को बढ़ावा दिया। इससे स्टॉक एक्सचेंजों में कंपनियों की लिस्टिंग में तेजी आई। इसकी वजह से बीएसई सेंसेक्स जो कि 1991-92 में लगभग 263 प्रतिशत बढ़कर 4,500 अंक पर पहुंच गया। कुल मिलाकर, सेंसेक्स जो 1991 में लगभग 1,000 पर था, तब से लगभग 79 गुना बढ़कर लगभग 79,000 पर कारोबार कर रहा है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों को उत्कृष्ट रिटर्न मिल रहा है। आज शेयर बाजार में बड़े निवेशक ही नहीं छोटे शहरों में रहने वाले निवेशक भी निवेश कर रहे है, जो यह दिखाता है कि भारत आर्थिक परिदृश्य कितना मजबूत है। उदारीकरण के बाद भारतीय शेयर बाजार में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने उदारीकरण के कई उपायों का नेतृत्व किया, जिसने भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया और आधुनिक भारत की नींव रखी, जिसमें लाइसेंस राज का उन्मूलन, व्यापार उदारीकरण और भारत में विदेशी पूंजी निवेश की अनुमति जैसे विभिन्न नियम शामिल थे।