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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   HDFC Bank Fines MD & CEO, CFO ₹1 Lakh Each Over 'Business Overreach' in MSRDC Deposit Review

HDFC Fine: एचडीएफसी बैंक ने अपने ही CEO और CFO पर लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला?

Mon, 27 Jul 2026 06:56 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 27 Jul 2026 06:56 PM IST
सार

कॉरपोरेट गवर्नेंस की बड़ी मिसाल। जानें क्यों HDFC बैंक ने अपने ही CEO, CFO और रिटेल हेड पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना और क्या था MSRDC का पूरा विवाद। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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HDFC Bank Fines MD & CEO, CFO ₹1 Lakh Each Over 'Business Overreach' in MSRDC Deposit Review
एचडीएफसी बैंक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में कॉरपोरेट गवर्नेंस और आंतरिक अनुशासन की एक बेहद दुर्लभ और बड़ी मिसाल देखने को मिली है। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक (एचडीएफसी बैंक) के बोर्ड ने अपने ही प्रबंध निदेशक (एमडी) व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) और रिटेल एसेट्स के ग्रुप हेड पर एक-एक लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना और चेतावनी पत्र जारी किया है। बैंकिंग इतिहास में किसी बैंक द्वारा अपने ही शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ ऐसी अनुशासनात्मक कार्रवाई करना बेहद असाधारण है। यह फैसला एक सरकारी बुनियादी ढांचा एजेंसी के साथ हुए जमा समझौतों की स्वतंत्र आंतरिक समीक्षा में "बिजनेस ओवररीच" (व्यावसायिक सीमा का उल्लंघन) पाए जाने के बाद लिया गया है।

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आखिर शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की नौबत क्यों आई?

एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के साथ बैंक के जमा समझौतों की एक विस्तृत आंतरिक समीक्षा पूरी की है। यह समीक्षा स्वतंत्र निदेशकों की एक विशेष अनुशासनात्मक समिति द्वारा की गई थी। इस समिति ने साल 2017 और 2021 में इस सरकारी बुनियादी ढांचा एजेंसी से जमा राशि जुटाने के लिए किए गए बैंक के समझौतों की गहन जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर, बोर्ड ने 23 जुलाई 2026 को हुई अपनी बैठक में पाया कि इस प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी "बिजनेस ओवररीच" के दोषी थे, जिसके बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

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क्या इस मामले में कोई व्यक्तिगत हेराफेरी या गलत मंशा थी?

इस स्वतंत्र समीक्षा में यह स्पष्ट रूप से साफ हो गया है कि इस पूरे मामले में किसी भी तरह का निजी फायदा या गलत मंशा शामिल नहीं थी। बैंक द्वारा जारी एक सार्वजनिक बयान में कहा गया कि स्वतंत्र निदेशकों की विशेष अनुशासनात्मक समिति की सिफारिशों के बाद बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि संबंधित कर्मचारियों का आचरण किसी दुर्भावना, व्यक्तिगत संवर्धन या अनुचित उद्देश्य से प्रेरित नहीं था। यह मुख्य रूप से बैंक के व्यावसायिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए की गई एक "व्यावसायिक अति-सक्रियता" (बिजनेस ओवररीच) थी, जिसमें कोई अनुचित मंशा शामिल नहीं थी।

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रिजर्व बैंक के नियमों के उल्लंघन का क्या खतरा था?

भले ही अधिकारियों की मंशा गलत नहीं थी, लेकिन बैंक के बोर्ड ने पाया कि उनका यह आचरण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लागू दिशा-निर्देशों से संभावित रूप से अलग हो सकता था। नियामक अनुपालन की गरिमा को बनाए रखने और भविष्य में ऐसी किसी भी नियामक चूक को रोकने के लिए बोर्ड ने यह कड़ा कदम उठाया। इसके तहत बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) और ग्रुप हेड - रिटेल एसेट्स को लिखित वार्निंग लेटर के साथ-साथ एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का अंतिम फैसला किया गया।

इस मामले में अन्य कर्मचारियों पर क्या एक्शन लिया गया?

एचडीएफसी बैंक ने केवल शीर्ष अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य कर्मचारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। बैंक के अनुसार, जमा व्यवस्था के इस मामले में शामिल अन्य सभी कर्मचारियों को भी लिखित रूप में चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं। यह कदम दर्शाता है कि बैंक नियामक नियमों के कड़ाई से पालन को लेकर अपनी आंतरिक प्रणालियों और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।



बैंकिंग उद्योग में जहां आमतौर पर विनियामक नियमों के उल्लंघन पर आरबीआई कीी ओर बैंकों पर जुर्माना लगाया जाता है, वहीं एचडीएफसी बैंक द्वारा अपने ही शीर्ष प्रबंधन पर आंतरिक जांच के बाद जुर्माना लगाना कॉरपोरेट जवाबदेही का एक नया मानक स्थापित करता है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि बैंक के व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दौड़ में केंद्रीय बैंक के नियमों और आंतरिक अनुपालन मानकों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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