कुछ महीनों में बेहद सरल होगा GSTN सिस्टम, छोटे कारोबारियों को मिलेगी एसएमएस से फाइल करने की सुविधा
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प्रश्न- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अब तक के सफर को आप किस तरह देखते हैं?
उत्तर- जीएसटी का अभी तक का सफर तो महज एक साल का ही है, लेकिन इस दिशा में हमारी तैयारी तीन-चार साल से चल रही है। देश में जीएसटी व्यवस्था लागू होने से पहले केंद्र और राज्य सरकारों का तंत्र अलग-अलग था। कई राज्यों में तो बाबा आदम जमाने के खाता-बही की व्यवस्था भी चल रही थी। हमने सबका तंत्र एक किया।
सबके लिए एक साझा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया। हमने केंद्र और राज्यों के 65,000 से भी ज्यादा कर अधिकारियों को नई कर प्रणाली केे बारे में प्रशिक्षण दिया। इसमें काम करने के लिए हमने क्लासरूम ट्रेनिंग, वर्चुअल सेशन और वेबिनार का भी आयोजन किया। हमने जो जीएसटीएन प्लेटफॉर्म तैयार किया, वह कैसे काम करता है, इसकेलिए 24 घंटे चलने वाला हेल्पलाइन शुरू किया। साथ ही, हेल्क डेस्क बनाया और सेल्फ हेल्प पोर्टल भी चलाया। तब जाकर यह सफल हो पाया है।
प्रश्न- जीएसटी नेटवर्क पर करदाताओं को परेशानी का सामना भी करना पड़ा?
उत्तर - हां, ऐसा भी हुआ। हमने उन परेशानियों से सबक लिया और अब हम जीएसटीएन प्लेटफॉर्म में नई-नई सहूलियतें जोड़ रहे हैं। हमारा पूरा ध्यान यूजर इंटरफेस पर है। सिस्टम की सुस्ती, रिटर्न भरने में हो रही दिक्कतें, निर्यातकों के रिफंड में हो रही परेशानी से संबंधित सामान्य शिकायतों को आधार बनाकर ही हम नई सुविधा विकसित कर रहे हैं। आप मान कर चलिए कि अगले कुछ महीनों में सिस्टम बेहद सरल होने वाला है।
जल्द आएगा नया रिटर्न फार्म
प्रश्न- देश में सभी कारोबारी तकनीकी रूप से या जानकारी में उतने सक्षम नहीं हैं। इस दिशा में आप क्या कर रहे हैं?
उत्तर- आप सही कह रहे हैं। सभी कारोबारियों के पास तकनीकी रूप से सक्षम लोगों की टीम नहीं है और सभी सीए या पेशेवरों की सेवा भी नहीं ले सकते हैं। इसलिए हमने जीएसटी फॉर्म को सरल करना शुरू कर दिया है। हाल में हमने जीएसटी 3बी फॉर्म को सरल किया है।
अब सिस्टम ही बताता है कि आपका इनपुट क्रेडिट कितना है और उसे कहां वितरित करना है। आप वहीं एक बटन दबाकर चालान भी जेनरेट कर सकते हैं। अब तक सिस्टम एरर तो दिखाता था, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं देता था। अब हम हर एरर को एक कोड दे रहे हैं, जिससे सिस्टम बताएगा कि किस तरह की गलती हुई है और क्या समाधान है।
प्रश्न- वित्त मंत्री ने नया रिटर्न फॉर्म लाने की घोषणा की है। यह कब तक आ जाएगा?
उत्तर- आपने सही कहा, हम जीएसटी परिषद के साथ मिलकर नया रिटर्न फॉर्म लाने पर काम कर रहे हैं। जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में हमने इसका मसौदा भी रखा था, जिस पर कुछ और सुझाव मिले हैं। उन्हें भी इसमें शामिल किया जा रहा है। हम साल में पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए सहज और सुगम फॉर्म ला रहे हैं। यही नहीं, हम एसएमएस से भी रिटर्न दाखिल करने की सुविधा देने वाले हैं।
ऐसे जारी होता है पांच दिनों में रिटर्न
उत्तर- जीएसटी में रिफंड ऑटोमेटिक तरीके से जारी होता है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर सही तरीके से फॉर्म भरा गया हो, तो पांच-छह दिनों में रिफंड जारी हो जाता है। यदि किसी निर्यातक ने जीएसटी का भुगतान किया है, तो उन्हें जीएसटीआर -1 और जीएसटीआर - 3बी फॉर्म भरना पड़ता है। इसके साथ निर्यातक को शिपिंग बिल भी लगाना पड़ता है। इसे हम सीमा शुल्क विभाग के पास भेज देते हैं, ताकि यह पता चल सके कि उस कारोबारी ने वाकई में वस्तु का निर्यात किया है या नहीं। वहां से हरी झंडी मिलते ही रिफंड जारी हो जाता है। जिन कारोबारियों को रिफंड नहीं मिला है, उन्होंने निश्चित तौर पर फॉर्म भरने में गलती की है। ऐसे कारोबारियों के लिए ही रिफंड पखवाड़ा चलाया जा रहा है, जिसमें सीमा शुल्क विभाग के विशेष अधिकारी हिस्सा लेे रहे हैं और वे फॉर्म भरने में हुई गलतियों को हाथों-हाथ सुधार रहे हैं। सिस्टम के स्तर पर रिफंड में कोई देरी नहीं हो रही है।
प्रश्न- कहा जा रहा है कि जीएसटी में भी कर चोरी होने लगी है। इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तर- हम अब अपने सॉफ्टवेयर में ही ऐसा उपाय कर रहे हैं, जिससे अधिकारियों को करदाताओं द्वारा दी गई जानकारी का विश्लेषण करने में आसानी होगी। ऐसा होने पर किसी संभावित कर चोरी का भी पता लगाया जा सकेगा। इस समय हम विश्लेषण वाले हिस्से पर काम कर रहे हैं। हमने पहले ही जीएसटीआर -3बी और जीएसटीआर-1 के बीच तथा जीएसटीआर -3बी और जीएसटीआर -2ए में अंतर के बारे में कर अधिकारियों को सामान्य विश्लेषण आधारित जानकारी देनी शुरू कर दी है। यह जीएसटीएन द्वारा तैयार राज्यवार विस्तृत आंकड़ा है, जिसके आधार पर अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में करदाताओं द्वारा दाखिल रिटर्न को परख सकते हैं और गलतियों को पकड़ सकते हैं।
एसएमएस के जरिये जीएसटी रिटर्न कैसे संभव होगा?
उत्तर- यह संभव होगा, लेकिन सबके लिए नहीं। इस समय जितने करदाता रिटर्न दाखिल करते हैं, उनमें से करीब 24 फीसदी निल (शून्य) रिटर्न दाखिल करते हैं। मतलब उनका कोई टर्नओवर नहीं है। ऐसे करदाताओं ने कानूनी बाध्यता के चलते जीएसटी में पंजीकरण करा लिया है और रिटर्न भी दाखिल कर रहे हैं। इनके लिए एसएमएस से रिटर्न दाखिल करने की सुविधा शुरू होगी। इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार हो रहे हैं।