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15 फरवरी से लागू हो रहा है नया नियम, आयातकों-निर्यातकों को देनी होगी ये जानकारी

Mon, 10 Feb 2020 10:34 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 10 Feb 2020 10:34 AM IST
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GSTIN in documents for importes and exporters will be necessary from 15 february 2020

आयातकों और निर्यातकों के लिए 15 फरवरी से दस्तावेजों में अनिवार्य तौर पर माल एवं सेवा कर पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। राजस्व विभाग जीएसटी से राजस्व संग्रह में हो रहे नुकसान को रोकने और कर चोरी पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक परिपत्र जारी किया है। 

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15 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या है जीएसटीआईएन 

सीबीआईसी ने कहा है कि कुछ ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं, जिनमें निर्यातकों और आयातकों ने जीएसटीआईएन पंजीयन होने के बाद भी शिपिंग व एंट्री के बिल में जीएसटीआईएन की जानकारी नहीं दी। जीएसटीआईएन पैन आधारित 15 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या है और जीएसटी के तहत हर पंजीकृत निकाय को इसका आवंटन किया जाता है। आयातकों को सीमा शुल्क विभाग के पास एंट्री बिल जमा करना होता है जबकि निर्यातकों को शिपिंग बिल जमा करना होता है।

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परिपत्र में दी गई जानकारी

परिपत्र में कहा गया, ‘जीएसटी के तहत पंजीकृत निर्यातकों और आयातकों को निर्यात व आयात दस्तावेजों में 15 फरवरी, 2020 से अनिवार्य तौर पर जीएसटीआईएन की जानकारी देनी होगी।’ एएमआरजी एंड एसोसिएट्स में पार्टनर रजत मोहन ने कहा, ‘निर्यातकों और आयातकों द्वारा अनिवार्य तौर पर जीएसटीआईएन मुहैया कराने से आंकड़ों के विश्लेषण विशेषकर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के मामलों में काम बढ़ेगा। इससे कर अधिकारी सीमा पर कम मूल्य दिखाकर कर चोरी करने वालों को गिरफ्तार कर सकेंगे।’ ईवाई के कर भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि इससे जीएसटी के तहत राजस्व के नुकसान को रोकने और निर्यातकों और आयातकों के आंकड़ों का जीएसटी आंकड़ों के साथ मिलान किया जाना सुनिश्चित होगा।

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जनवरी में इतना रहा था जीएसटी संग्रह

बता दें कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह जनवरी में 1.1 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया था। सूत्रों ने यह जानकारी दी थी। यह राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय द्वारा तय किए गए लक्ष्य के अनुरूप है। इसके लिए उन्होंने कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की थीं। सूत्रों ने बताया था कि जनवरी में जीएसटी का घरेलू संग्रह करीब 86,453 करोड़ रुपये रहा है। वहीं आईजीएसटी और उपकर से 23,597 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। हालांकि उन्होंने बताया था कि ये आंकड़े अस्थायी हैं। 

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