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GST: जीएसटी ने पूरे किए 8 साल, कलेक्शन के तोड़े सभी रिकॉर्ड, जानें कितने फीसदी करदाताओं ने जमा किया टैक्स
Mon, 30 Jun 2025 03:30 PM IST
पवन पांडेय
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 30 Jun 2025 03:30 PM IST
सार
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी न केवल कर प्रणाली को आसान बना पाया, बल्कि व्यापारियों, उपभोक्ताओं और सरकार- तीनों के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है।जीएसटी लागू हुए आठ साल होने वाले हैं, वहीं चालू वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
देश की सबसे बड़ी कर सुधार व्यवस्था माने जाने वाले वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी ने अपने आठ साल पूरे करने के करीब है। 1 जुलाई 2017 को लागू हुए जीएसटी ने देश की कर प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 9.4 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान हर महीने औसतन ₹1.84 लाख करोड़ की वसूली हुई, जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन भी है।
करदाताओं की राय- 85% ने दी सकारात्मक रेटिंग
एक हालिया डेलॉइट सर्वे के अनुसार, 85 प्रतिशत करदाताओं ने जीएसटी को सरल और पारदर्शी व्यवस्था बताया है। पिछले चार वर्षों से टैक्सदाताओं की राय लगातार बेहतर होती जा रही है। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को नए भारत के लिए एक ऐतिहासिक कानून बताया था। अब आठ साल बाद इसके परिणाम खुद बयां कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें - India US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बनी सहमति; ट्रंप की समयसीमा से एक दिन पहले हो सकता है एलान
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जीएसटी से क्या-क्या बदला?
छोटे कारोबारियों को मिली राहत
पहले वैट जैसे टैक्स का दायरा बहुत कम था, जिससे छोटे कारोबारियों को भी टैक्स देना पड़ता था। जीएसटी ने छूट सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹40 लाख कर दिया, जिससे लाखों छोटे व्यापारियों को फायदा मिला है।
यह भी पढ़ें - विश्व बैंक की रिपोर्ट: संघर्ष की आग में जलते देश, एक अरब लोग झेल रहे गरीबी; पांच साल में 20% तक गिरती है आय
लॉजिस्टिक्स में क्रांतिकारी सुधार
पहले राज्यों की सीमाओं पर ट्रकों की लंबी लाइनें लगती थीं, और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। वहीं जीएसटी लागू होने के बाद यह बाधाएं हटीं है और ट्रांसपोर्ट समय में 33% तक की कमी आई है, ईंधन खर्च घटा और हाइवे भी कम भीड़भाड़ वाले हो गए हैं।
करदाताओं की संख्या में जबरदस्त उछाल
जीएसटी लागू होने के समय करदाताओं की संख्या करीब 60 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ हो गई है। इस आंकड़े से पता चलता है कि लोग अब ज्यादा संख्या में टैक्स सिस्टम से जुड़ रहे हैं।
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करदाताओं की राय- 85% ने दी सकारात्मक रेटिंग
एक हालिया डेलॉइट सर्वे के अनुसार, 85 प्रतिशत करदाताओं ने जीएसटी को सरल और पारदर्शी व्यवस्था बताया है। पिछले चार वर्षों से टैक्सदाताओं की राय लगातार बेहतर होती जा रही है। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को नए भारत के लिए एक ऐतिहासिक कानून बताया था। अब आठ साल बाद इसके परिणाम खुद बयां कर रहे हैं।
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जीएसटी से क्या-क्या बदला?
- एक राष्ट्र, एक कर- अब पूरे देश में एक जैसी कर व्यवस्था है। पहले राज्यों में अलग-अलग टैक्स लगते थे।
- पुराने टैक्स खत्म- एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट जैसे कई पुराने टैक्स को हटाकर जीएसटी लागू किया गया।
- उपभोक्ताओं को फायदा- रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे कि अनाज, तेल, चीनी, स्नैक्स और मिठाइयों पर टैक्स दरें घटीं।
- वित्त मंत्रालय के अनुसार, परिवारों की मासिक खर्चों में लगभग चार फीसदी की बचत हुई है।
छोटे कारोबारियों को मिली राहत
पहले वैट जैसे टैक्स का दायरा बहुत कम था, जिससे छोटे कारोबारियों को भी टैक्स देना पड़ता था। जीएसटी ने छूट सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹40 लाख कर दिया, जिससे लाखों छोटे व्यापारियों को फायदा मिला है।
यह भी पढ़ें - विश्व बैंक की रिपोर्ट: संघर्ष की आग में जलते देश, एक अरब लोग झेल रहे गरीबी; पांच साल में 20% तक गिरती है आय
लॉजिस्टिक्स में क्रांतिकारी सुधार
पहले राज्यों की सीमाओं पर ट्रकों की लंबी लाइनें लगती थीं, और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। वहीं जीएसटी लागू होने के बाद यह बाधाएं हटीं है और ट्रांसपोर्ट समय में 33% तक की कमी आई है, ईंधन खर्च घटा और हाइवे भी कम भीड़भाड़ वाले हो गए हैं।
करदाताओं की संख्या में जबरदस्त उछाल
जीएसटी लागू होने के समय करदाताओं की संख्या करीब 60 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ हो गई है। इस आंकड़े से पता चलता है कि लोग अब ज्यादा संख्या में टैक्स सिस्टम से जुड़ रहे हैं।
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