जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों को जारी होंगे 20 हजार करोड़ रुपये, 2022 के बाद भी लगेगा उपकर
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केंद्र ने सोमवार को कहा कि वह जीएसटी क्षतिपूर्ति के बकाया के मद में सोमवार रात राज्यों को 20,000 करोड़ रुपये जारी करेगा। जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिन राज्यों को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के हिस्से में 2017-18 के लिए कम प्राप्त हुआ, केंद्र उनके लिये अगले सप्ताह संचयी रूप से 24,000 करोड़ रुपये जारी करेगा।
राज्यों को क्षतिपूर्ति जारी करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ‘इस साल हमने अब तक जो भी संग्रह किया है, 20,000 करोड़ रुपये का वितरण सोमवार रात राज्यों को किया जाएगा।’ राज्यों को अप्रैल-जुलाई के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की जरूरत है।
आईजीएसटी के मुद्दे पर सीतारमण ने कहा कि कुछ राज्यों को अधिक आईजीएसटी का वितरण हुआ है, उसे वापस लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह राशि कितनी है। सीतारमण ने कहा कि अगले सप्ताह के मध्य में उन राज्यों को 24,000 करोड़ रुपये जारी किया जाएगा, जिन्हें आईजीएसटअी के हिस्से में वास्तविक बकाया के मुकाबले कम प्राप्त हुआ है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी जीएसटी उपकर जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पहले जीएसटी उपकर लगाए जाने की समय सीमा जून 2022 थी।
उन्होंने कहा कि ‘क्षतिपूर्ति उपकर पांच साल के बाद भी यानी जून 2022 के बाद भी लगाए जाने का निर्णय किया गया है। यह उतनी अवधि के लिए लगाया जाएगा, जो राजस्व अंतर को पूरा करने के लिए जरूरी होगा।’
गौरतलब है कि जीएसटी ढांचे के तहत कर 5, 12, 18, और 28 प्रतिशत के स्लैब में लगाए जाते हैं। उच्च दर से कर के अलावा आरामदायक तथा समाज के नजरिए से अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता है। उपकर से प्राप्त राशि का उपयोग राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए किया जाता है।
वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि एक जनवरी, 2021 से जीएसटी रिफंड पंजीकृत करदाता के पैन और आधार से जुड़े स्वीकृत बैंक खाते में ही किया जाएगा। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक में पांच करोड़ रुपये से कम के सालाना कारोबार वाले छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन बोझ को कम किया गया है। इसके तहत उन्हें एक जनवरी, 2021 से मासिक कर भुगतान के साथ तिमाही आधार पर जीएसटी रिटर्न भरने की अनुमति दी गई है। परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘इस श्रेणी में आने वाले करदाताओं के पास तिमाही के पहले दो महीनों के लिए पिछली तिमाही की शुद्ध कर देनदारी का 35 प्रतिशत भुगतान का विकल्प होगा। इसके लिए वे स्वत: सृजित चलान का उपयोग कर सकेंगे।’
वित्त सचिव ने कहा कि परिषद ने एक अप्रैल, 2021 इनवॉयस में वस्तुओं और बिक्री रिटर्न फार्म जीएसटीआर-1 के लिये एचएसएन (हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ नॉमेनक्लेचर) कोड के संशोधित जरूरत को भी मंजूरी दे दी है। एचएसएन कोड वस्तुओं के वर्गीकरण का एक तरीका है। इसके तहत पांच करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले करदाताओं को कंपनियों के बीच (बी2बी) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति के लिए छह अंकों वाला एचएसएन या शुल्क कोड का उपयोग करना होगा। वहीं, पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वालों को चार अंकों का एचएसएन कोर्ड का उपयोग करना होगा।
इसके अलावा उपग्रहों के प्रक्षेपण को प्रोत्साहित करने के लिए भी कदम उठाया गया है। इसके तहत इसरो, एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और एनएसआईएल (न्यू इंडिया स्पेस लि.) को उपग्रह प्रक्षेपण सेवा के मामले में माल एवं सेवा कर से छूट दी गई है।