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इंटरनेट से डाउनलोड पर लगेगी इक्वलाइजेशन लेवी!

Tue, 22 Mar 2016 04:54 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 22 Mar 2016 04:54 AM IST
सार

  • अभी सिर्फ बी2बी वेबसाइट पर लगी है यह लेवी
  • विदेशी कंपनियां को भरना होगा कर

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Govt to impose equalisation levy on internet download charges
इंटरनेट

विस्तार

आने वाले दिनों में इंटरनेट से गाना या फिल्म डाउनलोड करने, ऑनलाइन पैसा चुका कर कोई आलेख या खबर पढ़ने या ई बुक डाउनलोड करने पर आपको इक्वलाइजेशन लेवी चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल सरकार ने यह लेवी ऑनलाइन विज्ञापन के जरिये कमायी करने वाली वेबसाइटों पर लगायी है लेकिन इसके दायरे में विस्तार का विकल्प खुला रखा गया है।

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वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अभी इक्वलाइजेशन लेवी को बी2बी कारोबार पर लगाया है। मतलब यदि कोई व्यक्ति गूगल या फेसबुक जैसी वेबसाइटों पर विज्ञापन देता है और 1 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करता है तो उसे इस लेवी का भुगतान करना होगा।
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उन्होंने बताया कि बाद में इसका दायरा ई कामर्स के अन्य प्रतिरूप पर भी बढ़ाया जा सकता है। प्रतिरूप क्या हो सकता है, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि समिति ने आने वाले वर्षों के लिए कुछ और रोडमैप सुझाए हैं। इनमें ऑनलाइन म्यूजिक या फिल्म डाउनलोड, ऑनलाइन किताब या आलेख डाउनलोड करना, ऑनलाइन खबरे पढ़ना आदि को भी इस दायरे में लाया जा सकता है। 

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विदेशी कंपनियां को भरना होगा कर

Govt to impose equalisation levy on internet download charges
गूगल

उल्लेखनीय है कि ई कॉमर्स कारोबार पर बनाई गई एक सरकारी समिति के 1 लाख रुपये से अधिक के सौदे पर इक्वलाइजेशन लेवी लगाने के सुझाव को इस बार बजट में शामिल कर लिया है। इसके तहत ऐसे सौदों पर 6 फीसदी की लेवी देय होगी। सोमवार को इस कमिटी की सिफारिशों को उजागर कर दिया गया।

इस लेवी को लगाने के पीछे सरकार का कहना है बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में कोई स्थायी ठिकाना नहीं बनाती लेकिन यहां से कमायी तो कर ही रही हैं। यहां आफिस नहीं होने की वजह से वह यहां टैक्स नहीं देती, इसलिए इस लेवी को बजट में शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014-15 में गूगल को भारत से 4108 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। फेसबुक ने भी आलोच्य अवधि में 1235 करोड़ रुपये की कमायी की थी। इस टैक्स के दायरे में ये कंपनियां इस कदर आ रही हैं कि इस वर्ष के बजट के पेश होने के बाद इसे मीडिया में इक्वलाइजेशन लेवी के बदले गूगल टैक्स के नाम से प्रचारित किया गया। 

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