H1B वीजा पर अमेरिकी रुख से चिंता में पड़े वाणिज्य और आईटी मंत्रालय
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एच1बी वीजा पर अमेरिकी सरकार के रुख को देखते हुए भारतीय आईटी कंपनियों के पक्ष में वाणिज्य से लेकर इलेक्ट्रॉनिकी व आईटी मंत्रालय तक ने कमर कस ली है। ये सभी मंत्रालय विदेश मंत्रालय से लगातार संपर्क में हैं और इस मामले में अमेरिकी विदेश मंत्रालय से बातचीत करने की कवायद चल रही है।
गत बृहस्पतिवार को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से आईटी कंपनियों के नुमाइंदे के साथ नैसकॉम व विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ वीजा मसले को लेकर बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक में आईटी कंपनियों से यह जानकारी ली गई कि वह अमेरिका सरकार की वीजा नीति से निपटने के लिए क्या नीति अपना रहे हैं।
भारतीय कंपनियों के काम पर पड़ सकता असर
वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही यह कह चुकी है कि वीजा नीति की वजह से अमेरिका में काम करने वाली भारतीय कंपनियों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि अमेरिका में काम करने वाली भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका की 500 से अधिक कंपनियों को अपनी सेवाएं देती हैं और अमेरिकी सरकार को ये भारतीय कंपनियां 20 लाख डॉलर का टैक्स देती है और इन कंपनियों ने वहां 4 लाख लोगों को नौकरी दे रखी है।
उन्होंने बताया कि भारत की तरफ से अमेरिकी शासन को भारत की चिंता से अवगत करा दिया गया है।