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FDI: चीन सहित पड़ोसी देशों से एफडीआई की मंजूरी में आई तेजी, सरकार ने प्रक्रिया का समय भी घटाया
Sun, 01 Jun 2025 08:04 PM IST
शिव शुक्ला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 01 Jun 2025 08:04 PM IST
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एफडीआई
- फोटो : अमर उजाला
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सरकार ने चीन सहित पड़ोसी देशों के एफडीआई आवेदनों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को काफी सुव्यवस्थित कर दिया है। इन प्रस्तावों पर तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं। साथ ही एफडीआई आवेदनों को तय समय सीमा में मंजूरी देने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति की नियमित बैठकें की जा रही हैं।
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वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, प्रेस नोट 3 के प्रावधानों के तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से लंबित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों की संख्या कम है। 2020 के प्रेस नोट 3 के तहत सरकार ने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से विदेशी निवेश के लिए इसकी पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी है। ये देश हैं चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान।
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निर्णय के अनुसार, इन देशों के एफडीआई प्रस्तावों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठकों की समीक्षा कैबिनेट सचिव स्तर पर भी नियमित रूप से होती है। वर्तमान में, गृह सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति प्रेस नोट के तहत आवेदनों पर विचार कर रही है। उद्योग विशेषज्ञों ने सरकार से प्रेस नोट 3 नियमों को आसान बनाने का आग्रह किया है, क्योंकि छोटी सी चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भी इसके तहत मंजूरी लेनी पड़ती है।
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आर्थिक सर्वेक्षण में चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल करने पर जोर
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार का दोहन करने के लिए चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल करने के कारगर प्रयास किए गए। सर्वेक्षण में कहा गया है कि चूंकि अमेरिका और यूरोप अपनी तत्काल आपूर्ति चीन से हटा रहे हैं। इसलिए पड़ोसी देश से आयात करने के बजाय चीनी कंपनियों के भारत में निवेश करने और फिर इन बाजारों में उत्पादों का निर्यात करना अधिक प्रभावी है। वर्तमान में भारत में आने वाले अधिकांश एफडीआई स्वचालित अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत आते हैं।
अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक भारत में दर्ज कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन केवल 0.34 प्रतिशत हिस्सेदारी (2.5 अरब अमेरिकी डॉलर) के साथ 23वें स्थान पर है।