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BPCL Sell Hold: सरकार ने बीपीसीएल की हिस्सेदारी बेचने का फैसला वापस लिया, जानें इसकी वजह

Thu, 26 May 2022 06:51 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 26 May 2022 06:51 PM IST
सार

सरकार ने बीपीसीएल में पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी। इसके लिए मार्च 2020 में बोलीदाताओं से रुचि पत्र आमंत्रित किए गए थे।

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Govt drops offer to sell 53 pc stake in BPCL as most bidders express inability to participate Latest News Update
बीपीसीएल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) में अपनी समूची 53 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश वापस ली। बताया जा रहा है कि ज्यादातर बोली लगाने वाली कंपनियों ने निजीकरण में भाग लेने को लेकर अक्षमता जाहिर की। इसके बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।

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सरकार ने बीपीसीएल में पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी। इसके लिए मार्च 2020 में बोलीदाताओं से रुचि पत्र आमंत्रित किए गए थे। नवंबर 2020 तक कम-से-कम तीन बोलियां आईं। हालांकि, दो बोलीदाता ईंधन कीमत निर्धारण को लेकर चीजें स्पष्ट नहीं होने जैसे कारणों से बोली से बाहर हो गए। इससे बोली में केवल एक ही कंपनी रह गई।
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निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने कहा कि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्थिति से दुनियाभर के उद्योग खासकर तेल एवं गैस क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। दीपम ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूदा हालात के कारण, अधिकतर पात्र इच्छुक पक्षों (क्यूआईपी) ने बीपीसीएल के विनिवेश की मौजूदा प्रक्रिया में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की है।
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विभाग ने कहा कि इसको देखते हुए विनिवेश पर मंत्रियों के समूह ने बीपीसीएल में रणनीतिक विनिवेश के लिए रुचि पत्र प्रक्रिया बंद करने का निर्णय किया है। विभाग ने कहा कि बीपीसीएल में रणनीतिक विनिवेश प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय अब स्थिति की समीक्षा के आधार पर उपयुक्त समय पर किया जाएगा।


उद्योगपति अनिल अग्रवाल की खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता समूह और अमेरिकी उद्यम कोष अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट तथा आई स्क्वायर्ड कैपिटल एडवाइजर्स ने बीपीसीएल में सरकार की 53 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। लेकिन पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन में घटती रुचि के बीच दोनों इकाइयां वैश्विक निवेशकों को जोड़ पाने में असमर्थ रहीं और बोली से हट गईं। सरकार ने वित्तीय बोलियां आमंत्रित नहीं की थीं।

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