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सरकार की तैयारी: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फेक रिव्यू पर लगेगी लगाम, बनाई जा रही यह बड़ी योजना
Sat, 28 May 2022 05:11 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Sat, 28 May 2022 05:11 PM IST
सार
उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस संबंध में कोई एसओपी मौजूद है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस संभावना पर भी गौर किया जा रहा है कि फर्जी समीक्षाओं से उपभोक्ताओं को निजात दिलाने के लिए किस तरह के मानक परिचालन सिद्धांत बन सकते हैं।
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ई-कॉमर्स
- फोटो : social media
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विस्तार
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उत्पादों व सेवाओं की फर्जी समीक्षाओं से ग्राहकों की सुरक्षा के लिए अपने कदम आगे बढ़ाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार उपभोक्ताओं को बचाने के लिए एसओपी लेकर आएगी। सरकार ने इस संबंध में ई-कॉमर्स कंपनियों समेत अन्य संबंधित पक्षों से सलाह भी मांगी है।
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उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह ने ई-कॉमर्स कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ इस मुद्दे पर एक बैठक की। रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) के साथ वर्चुअल बैठक के दौरान फेक रिव्यू से संभावित ग्राहकों को गुमराह करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के मुद्दे पर चर्चा की। बैठक के बाद सरकार की ओर से शनिवार को कहा गया कि ग्राहकों की सुरक्षा लिए वह ऑनलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म्स पर प्रोडक्ट्स एवं सर्विसेज की फेक रिव्यू पोस्ट करने पर रोक लगाने के लिए एक प्रारूप विकसित करेगी।
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रिपोर्ट में मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस संबंध में कोई एसओपी मौजूद है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस संभावना पर भी गौर किया जा रहा है कि फर्जी समीक्षाओं से उपभोक्ताओं को निजात दिलाने के लिए किस तरह के मानक परिचालन सिद्धांत बन सकते हैं। इस मामले पर बैठक में शामिल सभी पक्षों से सलाह मांगी गई है।
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सभी पक्षों की सलाह के आधार पर मंत्रालय ग्राहकों की सुरक्षा के मद्देनजर एक कानूनी प्रारूप तैयार करेगा। गौरतलब है कि इस बैठक से पहले सचिव रोहित कुमार ने यूरोपीयन यूनियन में 223 बड़ी वेबसाइट पर ऑनलाइन रिव्यू की स्क्रीनिंग सभी पक्षधारकों के साथ साझा की थी। स्क्रीनिंग में सामने आया था कि करीब 55 फीसदी वेबसाइट्स ईयू की बिजनेस प्रैक्टिस को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती हैं।
समीक्षाओं के आधार पर ही ज्यादातर ग्राहक लेते हैं फैसला
भौतिक रूप में उत्पादों को देख नहीं पाने से ग्राहक ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर खरीदारी करने के पहले उस उत्पाद के बारे में डाली गई समीक्षाओं के जरिये फैसला करते हैं। कंपनियां यहीं पर उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए कई बार फर्जी समीक्षाओं की मदद लेती हैं। ऐसी फर्जी समीक्षाएं ग्राहकों को गलत खरीदारी के लिए प्रेरित करती हैं।
कंपनियों का दावा, उनके पास निगरानी की है प्रणाली
nबैठक में सभी हितधारकों ने रजामंदी जताई कि इस मुद्दे पर सघन निगरानी की आवश्यकता है। इसलिए उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और फर्जी समीक्षाओं को नियंत्रित करने के लिए एक उपयुक्त ढांचा और निगरानी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि वे इसके लिए कई मानकों के तहत कार्य कर रहे हैं। उनके पास ऐसी प्रणाली है, जिससे वे फर्जी समीक्षाओं की निगरानी करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र कानूनी ढांचा तैयार करता है और उसमें उनकी सहभागिता होती है तो वह उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे।
फर्जी समीक्षाएं व भ्रामक सूचनाएं उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन
फर्जी समीक्षाएं और भ्रामक सूचनाएं सूचना के अधिकार जो उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019 के तहत उपभोक्ता अधिकार का उल्लंघन है। देश में रोजमर्रा के जीवन में ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। इस दृष्टि से फर्जी समीक्षाएं उपभोक्ता अधिकारों पर खासा प्रभाव डालती हैं। मंत्रालय ने 223 प्रमुख वेबसाइटों की समीक्षा की थी। इसमें पाया गया कि 55 फीसदी वेबसाइटें यूरोपीय संघ द्वारा तय खरीदी-बिक्री के नियमों का उल्लंघन कर रही थी।
समीक्षा का चयन कैसे किया, यह भी कंपनियों को बताना होगा : मंत्रालय
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर उत्पादों एवं सेवाओं के बारे में अपनी समीक्षाएं पोस्ट करने वाले ग्राहकों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना और इस बारे में वेबसाइट की जवाबदेही तय करना, इस मुद्दे के दो अहम पहलू हैं। साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों को यह भी बताना होगा कि वे सर्वाधिक प्रासंगिक समीक्षा का चयन किस तरह निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करते हैं।