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5जी स्पेक्ट्रमः सभी कंपनियों को मिलेगा ट्रायल के दौरान परीक्षण करने का मौकाः प्रसाद

Mon, 30 Dec 2019 06:37 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 30 Dec 2019 06:37 PM IST
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government to allow all companies, vendors for 5g trial before auction says rs prasad
केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद - फोटो : ANI

केंद्र सरकार 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से पहले सभी कंपनियों को इसका परीक्षण करने की अनुमति देगी। दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार ने अपनी नीति को तैयार कर लिया है। 

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भविष्य है 5जी

प्रसाद ने कहा कि 5जी भविष्य है और इस क्षेत्र में हम इनोवेशन को पूरी तरह से बढ़ावा देंगे। 5जी का परीक्षण करने का मौका सभी कंपनियों के अलावा वेंडर्स जैसे कि हुवाई को भी मिलेगा। यह नया 5जी चंक बैंड जो कि 24.75 से 27.75 गीजहर्ट्ज का है, वो 5.22 लाख करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम नीलामी से काफी अलग है। इसकी मंजूरी डिजिटल कम्यूनिकेशन कमीशन ने 20 दिसंबर को दी थी, जिसके तहत 8300 मेगाहर्ट्ज का बैंड सभी 22 सर्किलों में बिक्री के लिए अगले साल मार्च-अप्रैल में रखा जाएगा।

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सरकार जल्द ही 24.75-27.25 गीगाहर्ट्ज के ‘मिलीमीटर वेव बैंड’ की नीलामी को लेकर ट्राई से सुझाव मांगेगी। यह 5जी के लिए अत्यधिक मांग वाला बैंड है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग इन अतिरिक्त 5जी बैंड के लिए जनवरी में नियामक से संपर्क करेगा। हालांकि, विभाग इस स्पेक्ट्रम की बिक्री साल की शुरुआत में करना चाहता है। लेकिन ट्राई के सुझावों में विशेष समय-सीमा का उल्लेख होगा। 

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सीओएआई ने की थी सिफारिश

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने सरकार से 26 गीगाहर्ट्ज बैंड के लिए ट्राई से सुझाव मांगने को कहा था। सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने हाल ही में कहा था कि हमने दूरसंचार विभाग से सिफारिश की थी कि वह इस नीलामी में 26 गीगाहर्ट्ज बैंड को शामिल करने के लिए ट्राई से सुझाव ले। भारत में 5जी शुरू करने के सपने को साकार करने में इसका महत्वपूर्ण असर होगा।


देश में 5जी सेवाओं को शुरू करने के लिए सरकार के पास नीलामी के पर्याप्त स्पेक्ट्रम है। इसलिए कंपनियों को इसे लेने के लिए किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं सरकार ने इस सेवा को शुरू करने के लिए 2020 का लक्ष्य तय किया है।

5जी में टाटा को 10 गीगाबिट प्रति सेकेंड की रफ्तार से ट्रांसफर करने की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ मामलों में यह रफ्तार 20 गीगाबिट प्रति सेकेंड भी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि निचली डाटा स्पीड के मामले में लगभग 320 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता है, जबकि उच्च डाटा स्पीड के मामले में 670 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी।


एरिक्सन ने अपने वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 5जी कनेक्शन 2022 से उपलब्ध होने की संभावना है। ट्राई के आकलन के आधार पर 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300-3400 मेगाहर्ट्ज, 3400-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड अभी तक अनबिके स्पेक्ट्रम का मूल्य 1 अगस्त 2018 के मुताबिक 4.9 लाख करोड़ रुपये है। 

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