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आधार बगैर जमीन को विशिष्ट पहचान नंबर देगी सरकार, खेत-प्लॉट समेत भूमि के हरेक टुकड़ा होगा डिजिटल
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 09 May 2018 03:02 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार देशभर में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने की तैयारी में है। इसमें खेत, प्लॉट और जमीन के हरेक टुकड़े को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा, जिसमें सेंध लगाना या छेड़छाड़ मुमकिन नहीं होगा। यह व्यवस्था नागरिकों को मुहैया कराए जा रहे आधार नंबर जैसी ही होगी लेकिन इसके लिए किसी को अंगुलियों के निशान या आंखों की पहचान नहीं देनी होगी।
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इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल करने की योजना पर चिट्ठी लिखी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात समेत 6 राज्यों ने इस पर अपनी सहमति भी जता दी है।
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आईटी मंत्रालय के मुताबिक इस व्यवस्था से बेनामी संपत्ति, भूमि विवाद और जमीन के फर्जीवाड़ों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लग सकेगा। इसके डेटा को आधार की तर्ज पर सुरक्षित किया जाएगा। एक विशिष्ट नंबर जमीन के हरेक टुकड़े का होगा जो सरकारी, निजी, संस्थान, कंपनी या विरासत की संपत्ति की श्रेणी पर आधारित होगा।
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मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक देश में कृषि, ढांचागत विकास और पर्यावरण को हो रहे नुकसान की जानकारी इस माध्यम के जरिए आसानी से जुटाई जा सकेगी। जबकि कृषि, निजी या व्यवसायिक भूमि से हो रही आय का भी पता जमीन के विशिष्ट पहचान डेटा की सहायता से लगाया जा सकेगा।
शुरू हो गया है डिजिटल इंडिया का दूसरा चरण
आईटी मंत्रालय के मुताबिक डिजिटल इंडिया के दूसरे चरण में राष्ट्रीय डिजिटल भूमि पहचान नंबर बनाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है और पांच चरण निर्धारित किए गए हैं। राज्यों द्वारा भूमि से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मुहैया कराते ही डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। जिन राज्यों ने डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए हैं उनका विलय इसमें कर दिया जाएगा और पूरे देश की जमीन के विशिष्ट नंबर के साथ एक डिजिटल मानचित्र तैयार होगा। मंत्रालय का कहना है कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस व्यवस्था के फायदे भेजे गए पत्र में गिनाए गए हैं। साथ ही जल्द इससे जुड़ने के लिए कदम बढ़ाने को कहा गया है।
जून मध्य में हो सकती है योजना की घोषणा
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार जून माह के मध्य में इस व्यवस्था की घोषणा कर सकती है। यह एक अहम कदम है जिससे जमीन की धोखाधड़ी, बेनामी संपत्ति और विवादों के निपटारे में सहूलियत होगी। अधिकारी ने कहा कि जमीन को विशिष्ट पहचान देने के लिए किसी व्यक्ति को अंगुलियों के निशान या आंखों की पहचान नहीं देनी होगी। यह व्यवस्था राज्यों द्वारा मुहैया करायी गई जानकारी और दस्तावेजों पर आधारित होगी जिसे बाद में उसके मालिक के आधार नंबर से लिंक करा दिया जाएगा। साथ ही उपजाऊ जमीन को भूमि अधिग्रहण से बचाने की दिशा में भी आसानी से कदम बढ़ाए जा सकेंगे।
गौरतलब है कि सरकार पहले नागरिकों के लिए आधार लाई, इसके बाद गाय और अब जमीनों को विशिष्ट पहचान नंबर देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। हालांकि नागरिकों को सरकारी सुविधाएं और सेवाएं देने में आधार को अनिवार्य करने का मसला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
जून मध्य में हो सकती है योजना की घोषणा
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार जून माह के मध्य में इस व्यवस्था की घोषणा कर सकती है। यह एक अहम कदम है जिससे जमीन की धोखाधड़ी, बेनामी संपत्ति और विवादों के निपटारे में सहूलियत होगी। अधिकारी ने कहा कि जमीन को विशिष्ट पहचान देने के लिए किसी व्यक्ति को अंगुलियों के निशान या आंखों की पहचान नहीं देनी होगी। यह व्यवस्था राज्यों द्वारा मुहैया करायी गई जानकारी और दस्तावेजों पर आधारित होगी जिसे बाद में उसके मालिक के आधार नंबर से लिंक करा दिया जाएगा। साथ ही उपजाऊ जमीन को भूमि अधिग्रहण से बचाने की दिशा में भी आसानी से कदम बढ़ाए जा सकेंगे।
गौरतलब है कि सरकार पहले नागरिकों के लिए आधार लाई, इसके बाद गाय और अब जमीनों को विशिष्ट पहचान नंबर देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। हालांकि नागरिकों को सरकारी सुविधाएं और सेवाएं देने में आधार को अनिवार्य करने का मसला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।