खास नहीं बढ़े हैं पेट्रोल -डीजल के दाम, सरकार ने GST पर भी दिया जोर का झटका
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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच सरकार ने आम जनता को किसी भी तरह की राहत देने से फिलहाल मना कर दिया है। सरकार के मुताबिक, अभी इनके दाम ज्यादा नहीं बढ़े हैं, जिससे इन पर एक्साइज ड्यूटी घटाना या फिर जीएसटी के दायरे में लाने का सही समय नहीं है। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उस मांग को भी सिरे से ठुकारा दिया है, जिसमें पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए कहा गया था।
एक हफ्ते से स्थिर हैं कीमतें
फिलहाल पेट्रोल-डीजल की देश भर में कीमतें पिछले एक हफ्ते से स्थिर हैं। इनमें किसी तरह का कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला है। यह एक फौरी राहत है, लेकिन कीमतों में कमी न होने से आम आदमी बेहाल हुआ पड़ा है।
वित्त मंत्रालय भी जीएसटी के पक्ष में नहीं
वित्त मंत्रालय भी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के फिलहाल पक्ष में नहीं है। राज्य सरकारें भी पहले से ऐसा करने के विरोध में हैं, क्योंकि इससे उनकी कमाई पर काफी असर पड़ेगा। अगर सरकार इनको जीएसटी के दायरे में ले भी आती है तो भी 28 फीसदी के बाद भी उसको ऊपरी टैक्स देना होगा।
सरकार के पास है 20 हजार करोड़ का अतिरिक्त फंड
केंद्र सरकार के पास अभी पेट्रोल-डीजल पर लगे टैक्स के कारण 20 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड है। इसके अभी भी काफी बढ़ने की उम्मीद है। वहीं राज्य सरकारों को भी इस मद से काफी कमाई हो रही है।
पांच साल में तीन गुना बढ़ी कमाई
पेट्रोल-डीजल एवं अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे टैक्स से केंद्र सरकार की कमाई पांच साल में करीब तीन गुनी बढ़ गई है। यह कर वसूली ऐसे हालात में हो रही है जब इंडियन बॉस्केट कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर गई है। इस समय डीजल की कीमतें एतिहासिक शीर्ष स्तर पर जबकि पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अप्रैल 2011 में 118.64 डॉलर के एतिहासिक शीर्ष स्तर पर थी, तब भी दिल्ली में पेट्रोल 58.37 रुपये जबकि डीजल 37.75 रुपये प्रति लीटर बिका था।
ऐसे बढ़ती गई कमाई
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स एवं सेस के मद में 88,600 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। यह 2014-15 में बढ़ कर 1,05,653 करोड़ रुपये, 2015-16 में 1,85,956 करोड़ रुपये, 2016-17 में 2,53,254 करोड़ रुपये और वर्ष 2017-18 में दिसंबर तक 2,01,592 करोड़ रुपये पर आ गया था। 2018-19 के बजट में कुल 2,57,850 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया है। यह वर्ष 2013-14 में हुई कुल वसूली के मुकाबले 2.91 गुना ज्यादा है।