2020 से बदल सकता है वित्त वर्ष, मोदी सरकार बदलने जा रही है 152 साल पुरानी परंपरा
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मोदी सरकार जल्द ही वित्त वर्ष में बड़ा बदलाव करने जा रही है। 2020 से पूरे देश में नया वित्त वर्ष लागू हो सकता है। इसके लिए सरकार की तरफ से एलान किया जा सकता है। हालांकि अगर वित्त वर्ष बदलता है तो फिर 152 साल से चल रही परंपरा इतिहास बन जाएगी।
अभी अप्रैल से मार्च तक वित्त वर्ष
फिलहाल देश में 1 अप्रैल से लेकर के 31 मार्च तक वित्त वर्ष होता है। सरकार से लेकर के आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थान भी इसी कैलेंडर का प्रयोग करते हैं। बजट भी इसी वित्त वर्ष को ध्यान में रखते हुए फरवरी के महीने में पेश किया जाता है।
बजट के बाद वित्त वर्ष का नंबर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष की शुरुआत 2020 से 1 जनवरी से 31 दिसंबर हो सकती है। इससे पहले सरकार बजट पेश करने की तारीख में भी बदलाव कर चुकी है। जहां पहले 28 फरवरी को बजट पेश किया जाता था, वहीं अब 1 फरवरी को इसे पेश किया जाना लगा है।
संसद की एक समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि वित्त वर्ष का समय 1 अप्रैल-31 मार्च के बजाए 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक लागू किया जाए। समिति ने सरकार से कहा है कि अंग्रेजों के समय से शुरू की गई प्रथा को जल्द से जल्द बदला जाए।
वित्त मंत्रालय से जुड़ी वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में संसदीय समिति ने 2017 में सिफारिश की थी कि 1867 से जारी प्रथा को बदला जाए। अगर वित्त वर्ष में बदलाव होता है तो आम आदमी के साथ-साथ सरकार के कार्य करने के तरीके में बदलाव हो जाएगा।
इससे बजट पेश करने की तारीख में बदलाव होगा, आयकर रिटर्न फाइल करने की तारीख और कंपनियों के वित्त वर्ष में भी बदलाव करना होगा। वित्त मंत्रालय के अलावा सभी मंत्रालयों को भी सारे खर्च 31 दिसंबर से पहले-पहले करना होगा।
30 साल पहले भी दिया गया सुझाव
1985 में राजीव गांधी की सरकार में एल के झा की अध्यक्षता में बनी समिति ने भी वित्त वर्ष को बदलने का सुझाव दिया था, लेकिन इसको खारिज कर दिया गया था। अब सरकार इसको बदलना चाहती है, जिस तरह से बजट पेश करने की तारीख को बदला गया था।पीएम मोदी ने मांगे जनता से सुझाव
पीएम मोदी ने वित्त वर्ष में बदलाव करने के लिए जनता से भी सुझाव मांगे हैं। इसके लिए पीएम मोदी ने सरकार की वेबसाइट mygov.in पर एक फोरम शुरू किया है जिसमें आम जनता से टिप्पणी और सूचनाएं मांगी गई हैं।इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष के मूल्यांकन, कृषि, कारोबार और कर प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताने के लिए कहा गया है।