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राहत: महंगे पेट्रोल पर सरकार का बड़ा फैसला, 2023 तक रखा 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य
Thu, 03 Jun 2021 02:14 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Thu, 03 Jun 2021 02:14 PM IST
सार
जनता को जल्द महंगा तेल खरीदने से थोड़ी राहत मिल सकती है क्योंकि सरकार ने 2023 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा है।
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पेट्रोल-डीजल
- फोटो : pixabay
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विस्तार
सरकार ने अगले दो साल में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा है, जिससे देश को महंगे तेल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। मालूम हो कि महंगे पेट्रोल को सस्ता करने के एक उपाय के रूप में पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाने का विकल्प सुझाया गया था।
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सरकार ने इससे पहले 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसे और नजदीक करते हुए 2023 कर दिया गया है। ऐसे में जनता को जल्द महंगा तेल खरीदने से थोड़ी राहत मिल सकती है।
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पिछले साल सरकार ने 2022 तक के लिए पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण (10 फीसदी एथेनॉल को 90 फीसदी पेट्रोल के साथ मिलाना), उसके बाद एथेनॉल मिश्रण की मात्रा को 2030 तक बढ़ाकर 20 फीसदी करने का लक्ष्य रखा था। इस साल की शुरुआत में इसे 2030 के बजाय 2025 कर दिया गया था और अब इसमें और सुधार करते हुए इसे अप्रैल 2023 कर दिया गया। इस संदर्भ में पेट्रोलियम मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा कि, 'केंद्र सरकार यह निर्देश देती है कि तेल कंपनियां सभी राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों में भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप 20 फीसदी एथेनॉल के सम्मिश्रण वाला पेट्रोल बेचेंगी। यह अधिसूचना एक अप्रैल, 2023 से प्रभाव में आएगी।'
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तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है भारत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी मांग के 85 फीसदी हिस्से के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है। पिछले साल अक्तूबर में शुरू हुए मौजूदा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में भारत की योजना 10 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण वाला पेट्रोल बेचने की है। इस अनुपात को हासिल करने के लिए करीब चार अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी। वर्ष 2023 तक 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने के लिए 10 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी। जरूरी सात अरब लीटर एथेनॉल के उत्पादन के लिए चीनी उद्योग को 60 लाख टन अधिशेष चीनी का इस्तेमाल करना होगा जबकि शेष एथेनॉल का उत्पादन अतिरिक्त अनाज से किया जाएगा।
क्या होता है एथेनॉल फ्यूल?
एथेनॉल एक प्रकार का फ्यूल है जिसके इस्तेमाल से प्रदूषण कम होता है इस फ्यूल से गाड़ियां भी चलाई जा सकती हैं। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। एथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो एथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती।
क्या हैं एथेनॉल के फायदे?
एथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है। इसके अलावा एथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। एथेनॉल में 35 फीसदी ऑक्सीजन होता है। एथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है।
हमें क्यों है एथेनॉल फ्यूल की जरूरत?
एथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है। इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है। कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकलता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। कहने का मतलब एथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।