फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Gold Prices, safe-haven demand from US-Venezuela tensions, weaker rupee context and market outlook

सोमवार को बाजार में क्या होगा: सोने में तेजी, रुपया कमजोर, अमेरिका-वेनेजुएला विवाद आखिर कितना असर डालेगा?

Sat, 03 Jan 2026 05:23 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 03 Jan 2026 05:23 PM IST
सार

America-Venezuela Conflict: वेनेजुएला में अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति मादुरो को बंधन बनाने की घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। वैश्विक बाजार में सोना $4,400 प्रति औंस के पार पहुंच गया है, रुपया पहले से ही डॉलर के मुकाबले 90 के पार है। पढ़ें भारत के वेनेजुएला में $600 मिलियन निवेश और वैश्विक बाजार पर इस संकट के असर की पूरी रिपोर्ट।

विज्ञापन
Gold Prices, safe-haven demand from US-Venezuela tensions, weaker rupee context and market outlook
अमेरिका वेनेजुएला विवाद - फोटो : amarujala.com

विस्तार

3 जनवरी 2026 को अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाने की घटना के बाद पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार को सुबह खुलने वाले वैश्विक और भारतीय बाजारों पर टिकी हैं। शनिवार की सुबह जब कराकस में अमेरिकी हवाई हमले हुए, तब तक वैश्विक बाजार सप्ताहांत के लिए बंद हो चुके थे, लेकिन 'ग्रे मार्केट' और सेंटिमेंट ने खतरे की घंटी बजा दी है। अनिश्चितता के इस माहौल में सोना $4,400 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है, जबकि डॉलर की 'सेफ हेवन' मांग के चलते रुपया 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर लड़खड़ा रहा है।

विज्ञापन


इस घटना ने न केवल लैटिन अमेरिका में शक्ति संतुलन को बदल दिया है, बल्कि वैश्विक कमोडिटी बाजार, सोने की कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।  दलाल स्ट्रीट से लेकर कमोडिटी डेस्क तक, हर निवेशक के मन में बस एक ही सवाल है- क्या वेनेजुएला का यह संकट तेल और शेयर बाजार में केवल एक अल्पकालिक झटका साबित होगा, या यह 2026 का पहला वैश्विक तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक परेशान करेगा?

विज्ञापन

3 जनवरी 2026 की रात क्या हुआ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पुष्टि की कि अमेरिकी विशेष बलों ने एक "बड़े पैमाने पर हमले" को अंजाम दिया है। मुख्य रूप से कराकस स्थित मुख्य सैन्य बेस 'फुएर्ते तिउना', ला कार्लोटा एयरबेस और ला गुएरा बंदरगाह को निशाना बनाया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर 'नार्को-टेररिज्म' के आरोप हैं और अमेरिका ने उन पर $50 मिलियन का इनाम रखा था।

मादुरो के बाद वेनेजुएला में क्या चल रहा?

मादुरो के हटाए जाने के बाद कराकस में अनिश्चितता का माहौल है। उपराष्ट्रपति डेलसी रोड्रिग्ज ने अमेरिका से मादुरो के "जीवन के प्रमाण" (Proof of Life) की मांग की है, जबकि रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रिनो लोपेज़ ने सेना को अलर्ट पर रखा है।

दूसरी तरफ, विपक्ष की नेता मारिया कोरीना मचाडो, जिन्होंने ट्रम्प प्रशासन के इस कदम का समर्थन किया है, ने "100 घंटे और 100 दिन" का खाका तैयार किया है। इसमें वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA का निजीकरण और विदेशी निवेश की वापसी शामिल है।

वेनेजुएला संकट का वैश्विक बाजार पर क्या असर?

अनिश्चितता के इस दौर में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश  की ओर रुख किया है, जिससे सोने और चांदी में ऐतिहासिक तेजी देखी गई है। भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते सोना इतिहास में पहली बार $4,400 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है। चांदी भी $75 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर होगा?

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और अब सैन्य कार्रवाई ने आपूर्ति शृंखला को बाधित कर दिया है। अमेरिका ने वेनेजुएला के 'डार्क फ्लीट' (अवैध तेल टैंकरों) पर भी नकेल कसी है।

ब्रेंट क्रूड $61 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि वैश्विक बाजार में अभी भी ओवर-सप्लाई (अतिरिक्त आपूर्ति) की स्थिति है, लेकिन वेनेजुएला के भारी क्रूड  की कमी जटिल रिफाइनरियों के लिए समस्या खड़ी कर सकती है। अब 4 जनवरी को होने वाली ओपेक+ की बैठक पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या कार्टेल उत्पादन बढ़ाएगा या मौजूदा कटौती जारी रखेगा? विश्लेषकों का मानना है कि रूस और सऊदी अरब मौजूदा नीति पर कायम रह सकते हैं।

वेनेजुएला संकट का भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत के लिए यह संकट दोहरी मार लेकर आया है- ये हैं ऊर्जा सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता। भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) का वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल प्रोजेक्ट में भारी निवेश है। प्रतिबंधों और अब सत्ता परिवर्तन के कारण ओवीएल का लगभग $600 मिलियन (करीब 5000 करोड़ रुपये) का लाभांश फंस गया है। पुरानी सरकार के साथ हुआ "तेल-बदले-लाभांश" समझौता अब खटाई में पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों (FPI) की ओर से भारतीय बाजार से निकासी और वैश्विक अस्थिरता के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह भारत के आयात बिल को महंगा करेगा और महंगाई बढ़ा सकता है । भारत का फार्मास्यूटिकल निर्यात, जो 2024 में $111 मिलियन था, भुगतान संकट के कारण बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

बाजार में अब आगे क्या?

2026 की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि भू-राजनीति अब अर्थशास्त्र को चला रही है। वेनेजुएला में अराजकता का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ेगा। शेयर बाजार पर भी सोमवार को इसका असर दिख सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने वेट एंड वॉच' की नीति अपनाई है, लेकिन ओवीएल के निवेश और गिरते रुपये को संभालने के लिए जल्द ही कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed