Go First Crisis: गो फर्स्ट की अपील पर NCLT में फैसला सुरक्षित, एयरलाइन कंपनी ने मांगी थी ये राहत
Go First Crisis: एनसीएलटी के समक्ष दायर अपनी याचिका में बजट एयरलाइन ने विमान पट्टेदारों को वसूली की कोई कार्रवाई करने से रोकने के साथ-साथ डीजीसीए और आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओं को प्रतिकूल कार्रवाई शुरू करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने गो फर्स्ट एयरलाइंस की अंतरिम राहत की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। एनसीएलटी के अध्यक्ष रामालिंगम सुधाकर व तकनीकी सदस्य एलएन गुप्ता की खंडपीठ ने कहा, 'हम आदेश सुरक्षित रख रहे हैं।' बता दें कि गो फर्स्ट ने अपनी अपील में कहा था कि एयरलाइन के कायाकल्प के लिए एक दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया जाना चाहिए। गो फर्स्ट ने एनसीएलटी से यह निर्देश देने की भी मांग की कि अगर एनसीएलटी आज याचिका स्वीकार नहीं करता है तो अंतरिम स्थगन के रूप में राहत प्रदान की जाए। गो फर्स्ट एयरलाइंस ने एनसीएलटी अदालत को सूचित किया था कि कंसोर्टियम के साथ बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है।
गो फर्स्ट एयरलाइन ने अपनी अपील में लगाई है ये गुहार
संकटग्रस्त गो फर्स्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से कुछ चीजों के लिए अंतरिम निर्देश देने की मांग की है। गो फर्स्ट ने जिन चीजों के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई है उनमें पट्टेदारों को विमान वापस लेने से रोकना और नियामक डीजीसीए को एयरलाइन के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई करने से रोकना शामिल है। गो फर्स्ट ने अपनी अपील में कहा है कि एनसीएलटी विमानों को पट्टे पर देने वालों को अपने विमान वापस लेने से रोके और साथ ही नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को किसी तरह की जबरिया कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दे। वाडिया समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन पर 11,463 करोड़ रुपये की देनदारी है। कंपनी ने स्वैच्छिक दिवाला समाधान कार्यवाही के लिए आवेदन किया है। एनसीएलटी की दिल्ली पीठ बृहस्पतिवार को गो फर्स्ट की अपील पर सुनवाई करेगी।
गो फर्स्ट ने तीन मई से तीन दिन के लिए अपनी सभी उड़ानें कर दी हैं रद्द
गो फर्स्ट ने तीन मई से तीन दिन के लिए अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एनसीएलटी के समक्ष दायर अपनी याचिका में एयरलाइन ने विमान पट्टेदारों को कोई भी वसूली कार्रवाई करने से रोकने के साथ-साथ डीजीसीए और आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओं को जबरिया कार्रवाई से रोकने की अपील की है। अपील में यह भी कहा गया है कि डीजीसीए, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और निजी हवाई अड्डा परिचालक को एयरलाइन को आवंटित प्रस्थान और पार्किंग स्लॉट को रद्द नहीं करें। एयरलाइन यह भी चाहती है कि ईंधन आपूर्तिकर्ता विमान परिचालन के लिए आपूर्ति जारी रखें।
गो फर्स्ट ने 17 साल से अधिक समय पहले उड़ान भरना किया था शुरू
गो फर्स्ट ने 17 साल से अधिक समय पहले उड़ान भरना शुरू किया था। एयरलाइन ने कहा है कि प्रैट एंड व्हिटनी द्वारा इंजन आपूर्ति न करने के कारण उसके बेड़े के आधे से अधिक विमान खड़े हैं जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। एयरलाइन पर कुल देनदारी 11,463 करोड़ रुपये है। इसमें 3,856 करोड़ रुपये की वह राशि भी शामिल है जो वह परिचालन ऋणदाताओं को चुकाने में चूकी है। विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों का बकाया 2,600 करोड़ रुपये है।