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SBI के अर्थशास्त्रियों ने जताया अनुमान, अक्तूबर-दिसंबर में भी 4.5 फीसदी रहेगी विकास दर

Thu, 27 Feb 2020 09:34 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 27 Feb 2020 09:34 AM IST
सार

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में भी विकास दर 4.5 फीसदी पर स्थिर रह सकती है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने सरकारी आंकड़े जारी होने के दो दिन पहले बुधवार को यह अनुमान जताया है। 

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GDP growth of India to stay flat in October to December says SBI economists
अर्थव्यवस्था

विस्तार

उनका कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर चीन में फैले कोरोना वायरस के संकट का बड़ा प्रभाव दिखेगा, क्योंकि हम विभिन्न उत्पादों के आयात के लिए चीन पर निर्भर हैं। दिसंबर में समाप्त तिमाही के जीडीपी के आंकड़े सरकार शुक्रवार को जारी करेगी।

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2019-20 के लिए विकास दर अनुमान 4.7 फीसदी

एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने 2019-20 के लिए विकास दर अनुमान को संशोधित कर 4.7 फीसदी किया है, जो पहले 4.6 फीसदी बताया था। गौरतलब है कि 2019-20 जीडीपी वृद्धि दर 5 फीसदी से नीचे रहने की आशंका है, जो एक दशक का निचला स्तर है। इस पर सबसे ज्यादा असर घरेलू खपत में गिरावट और वैश्विक बाजार में सुस्ती की वजह से निर्यात में कमी का पड़ा है। कोरोना वायरस के असर की बाबत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा प्रभाव फार्मा से चीन से आयातित उद्योगों पर दिखेगा, जिसमें कॉटन, डायमंड, ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, यह उजागर होने के बाद वायरस पक्षियों से नहीं फैला है, पॉल्ट्री जैसे सेक्टर पर इसका कम असर होगा।  

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2018-19 में थी 6.8 फीसदी 

2018-19 में विकास दर 6.8 फीसदी रही थी। इस हिसाब से देखा जाए तो फिर इसमें करीब 1.8 फीसदी की गिरावट है। विश्व की सभी रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी भारत के जीडीपी अनुमान को काफी घटा दिया है।  मूडीज ने मार्च 2020 में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुमान 5.8 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया है। फिच ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विकास दर के 4.6 फीसदी रहने की संभावना जताई है। वहीं 2020-21 के लिए 5.6 फीसदी और 2021-22 के लिए 6.5 फीसदी का अनुमान जताया है। 

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फिच ने जताया यह अनुमान

रेटिंग एजेंसी फिच ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विकास दर के 4.6 फीसदी रहने की संभावना जताई है। वहीं 2020-21 के लिए 5.6 फीसदी और 2021-22 के लिए 6.5 फीसदी का अनुमान जताया है।

आईएमएफ के अनुसार इतनी हो सकती है वृद्धि दर

आईएमएफ ने अक्तूबर में भारत की 2019 की आर्थिक वृद्धि की दर को 6.1 फीसदी और 2020 में इसके सात फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया था।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी जताया अनुमान

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 5.7 फीसदी रह सकती है। एक अध्ययन में कहा गया है कि कुछ अन्य उभरते देशों में जीडीपी वृद्धि दर में इस साल कुछ तेजी आ सकती है। बीते वर्ष वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर सबसे कम 2.3 फीसदी रहने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह बात कही। यूएन विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना (डब्ल्यूईएसपी), 2020 के मुताबिक, साल 2020 में 2.5 फीसदी वृद्धि की संभावना है। हालांकि व्यापार तनाव, वित्तीय उठा-पटक एवं भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की वजह से चीजें पटरी से उतर सकती हैं।

विश्व बैंक ने की विकास दर के अनुमान में कटौती

विश्व बैंक ने कहा था कि वित्त वर्ष 2019-2020 में भारत की जीडीपी में बढ़त दर सिर्फ पांच फीसदी रह सकती है। लेकिन अगले वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में विश्व बैंक ने 5.8 फीसदी बढ़त का अनुमान जताया है। यह वर्ल्ड बैंक के अनुमान में बड़ी कटौती है। इससे पहले अक्तूबर माह में विश्व बैंक ने कहा था कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत के जीडीपी में छह फीसदी की ग्रोथ हो सकती है।

मूडीज ने भी की थी कटौती

वहीं रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी वित्त वर्ष 2020 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया थी। मूडीज ने यह 6.6 फीसदी से घटकर 5.4 फीसदी कर दिया है। साथ ही रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 2021 में जीडीपी बढ़त के अनुमान को 6.7 फीसदी से घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है। इस संदर्भ में मूडीज ने कहा था कि कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में जो सुस्ती है। इसलिए भारत के जीडीपी ग्रोथ में तेजी की रफ्तार कम हो सकती है। साथ ही एजेंसी ने कहा कि भारत में अब किसी भी तरह के सुधार को उम्मीद से कम ही माना जाना चाहिए।

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