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विश्व भर में महंगा हुआ खान-पान, कीमतों में हुआ 1.5 फीसदी का इजाफा

Fri, 10 May 2019 08:18 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 10 May 2019 08:18 PM IST
सार

  • डेयरी और मांस के दाम में तेजी के कारण बढ़ी कीमतें
  • 1.5 फीसदी बढ़ गई खाद्य उत्पादों पर महंगाई
  • 2.772 अरब टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा अनाज उत्पादन

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food inflation rises globally by 1.5 percent in april says fao
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

वैश्विक स्तर पर डेयरी और मांस के दाम में तेजी के कारण अप्रैल, 2019 में खाद्य की कीमतों में 1.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। हालांकि, अनाज की कीमतों में गिरावट आई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने इस साल के लिए वैश्विक अनाज उत्पादन का अपना पहला सूचकांक जारी किया है।
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इसमें उसने कहा है कि 2018 में आई गिरावट के बाद 2019 में रिकॉर्ड उत्पादन देखने को मिल सकता है। अपने अनुमान में एफएओ का कहना है कि इस साल वैश्विक स्तर पर अनाज उत्पादन 2.772 अरब टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा, जो 2018 के मुकाबले 2.7 फीसदी अधिक रहेगा। प्रमुख अनाज में गेहूं, मक्का और जौ के उत्पादन में सबसे अधिक क्रमश: पांच फीसदी, 2.3 फीसदी और 5.4 फीसदी की वृद्धि रह सकती है। 
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अप्रैल में अधिक रहा खाद्य मूल्य सूचकांक 

संयुक्त राष्ट्र के संगठन द्वारा जारी अनुमान के मुताबिक, एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक अप्रैल में औसतन 170.1 था। यह मार्च के संशोधित 167.5 अंक से अधिक था। संशोधन से पहले मार्च का खाद्य मूल्य सूचकांक 167 अंक था।
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पिछले महीने यह जून, 2018 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर था। इसके बावजूद यह अपने एक साल पहले के स्तर से करीब 2.3 फीसदी कम रहा। खाद्य मूल्य सूचकांक के जरिए अनाज, तेलहन, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी की कीमतों में मासिक परिवर्तन को मापा जाता है। 

अनाज सूचकांक में लगातार चौथी गिरावट

एफएओ का डेयरी मूल्य सूचकांक मार्च के मुकाबले पिछले महीने 5.2 फीसदी अधिक रहा। मक्खन, दूध पाउडर और पनीर के मजबूत आयात के कारण इस सूचकांक में लगातार चौथे महीने उछाल देखने को मिली। मांस का मूल्य सूचकांक महीने-दर-महीने के लिहाज से तीन फीसदी तेज रहा।

इस दौरान सुअर के मांस की कीमतों में तेजी से एशिया में इसके आयात मांग में वृद्धि देखी गई। अफ्रीकी स्वाइन फ्लू के तेजी से प्रसार ने चीन के स्थानीय बाजार को प्रभावित किया। उधर, चीनी और वनस्पति तेल सूचकांक भी तेज रहा।

अनाज मूल्य सूचकांक में लगातार चौथी बार गिरावट देखी गई। 2019 में गेहूं की कीमतों पर असर पड़ने के अनुमान के कारण अप्रैल में भी इसमें 2.8 फीसदी की गिरावट रही। एफएओ का कहना है कि सामान्य रूप से अनाज मूल्य सूचकांक पर ‘बड़े निर्यात उपलब्धता और धीमे व्यापार’ का दबाव देखने को मिला।

खपत बढ़ने का अनुमान

वैश्विक स्तर पर चावल के उत्पादन में काफी हद तक स्थिरता देखी गई। एफएओ का कहना है कि इस साल वैश्विक स्तर पर अनाज की खपत में कम-से-कम 1.1 फीसदी की वृद्धि हुई है। बढ़ती वैश्विक आबादी के कारण 2019-20 में इसकी खपत 1.5 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। इसका अर्थ है कि वैश्विक स्तर पर अनाज का स्टॉक 0.7 फीसदी घटकर 84.7 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो मात्रा के लिहाज से 2015-16 के बाद सबसे कम है। 
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