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India GDP: फिच ने जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4% से घटाकर 6.3% किया, कहा- टैरिफ का कंपनियों पर सीमित असर
Fri, 01 Aug 2025 04:19 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 01 Aug 2025 04:19 PM IST
सार
India GDP: फिच रेटिंग्स को उम्मीद है कि मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में उसकी ओर से रेटिंग प्राप्त भारतीय कॉरपोरेट्स के क्रेडिट मेट्रिक्स में सुधार होगा, क्योंकि व्यापक EBITDA मार्जिन उनके हाई कैपेक्स को संतुलित कर देगा। भारत की वृद्धि दर पर रेटिंग एजेंसी ने क्या कहा है, आइए जानते हैं।
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फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट
- फोटो : एक्स
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विस्तार
फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान को घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया और कहा कि उसे भारतीय कंपनियों पर उच्च अमेरिकी टैरिफ का सीमित प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
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अप्रैल में अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में फिच ने 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। फिच ने शुक्रवार को जारी इंडिया कॉरपोरेट्स क्रेडिट ट्रेंड्स रिपोर्ट में कहा, "हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहेगी और मजबूत बुनियादी ढांचागत खर्च से सीमेंट और निर्माण सामग्री, बिजली, पेट्रोलियम उत्पाद, इस्पात और इंजीनियरिंग एवं निर्माण (ईएंडसी) कंपनियों की मांग में मजबूती आएगी।"
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फिच रेटिंग्स को उम्मीद है कि मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में उसकी ओर से रेटिंग प्राप्त भारतीय कॉरपोरेट्स के क्रेडिट मेट्रिक्स में सुधार होगा, क्योंकि व्यापक EBITDA मार्जिन उनके हाई कैपेक्स को संतुलित कर देगा।
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अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बारे में फिच ने कहा कि उसे उम्मीद है कि उच्च अमेरिकी टैरिफ से उसके द्वारा रेटिंग प्राप्त भारतीय कंपनियों पर "सीमित प्रत्यक्ष प्रभाव" पड़ेगा, क्योंकि अमेरिकी निर्यात जोखिम सामान्यतः कम से मध्यम स्तर का है।
हालांकि, कुछ मामलों में अतिरिक्त आपूर्ति से दूसरे दर्जे के जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। फिच ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकता है, और कंपनियाँ निर्यात में विविधता लाकर टैरिफ के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है, साथ ही रूस के साथ व्यापार पर 'जुर्माना' भी लगाया है। ये टैरिफ 7 अगस्त से लागू होंगे।
भारत और अमेरिका पहले से ही एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते की बातचीत में, भारत ने कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की अमेरिकी मांग पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। नई दिल्ली ने अब तक डेयरी क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते में अपने किसी भी व्यापारिक साझेदार को कोई शुल्क रियायत नहीं दी है।
फिच रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि घरेलू स्तर पर केंद्रित क्षेत्रों जैसे तेल और गैस अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, सीमेंट और निर्माण सामग्री, इंजीनियरिंग और निर्माण, दूरसंचार और उपयोगिताओं पर न्यूनतम प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देगा, जिसे स्थानीय मांग और/या नियामक स्थिरता से समर्थन मिलेगा।
हालांकि, टैरिफ अनिश्चितता वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका और यूरोप को विवेकाधीन आईटी और ऑटो आपूर्तिकर्ता निर्यात को सीमित कर सकती है, जबकि संभावित अमेरिकी नीतिगत बदलाव फार्मास्यूटिकल्स को प्रभावित कर सकते हैं। फिच ने कहा कि भारत को अतिरिक्त आपूर्ति के कारण इस्पात और रसायन को मूल्य निर्धारण दबाव का सामना करना पड़ सकता है, तथा विकास जोखिमों के बीच धातु और खनन में अधिक मूल्य अस्थिरता देखी जा सकती है।