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वित्तीय समझदारी और साख: महिलाएं रहती हैं ज्यादा सतर्क, क्रेडिट स्कोर पुरुषों से बेहतर, कर्ज भी ज्यादा
Wed, 22 Dec 2021 05:31 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 22 Dec 2021 05:31 AM IST
सार
क्रेडिट स्कोर का 800 से ज्यादा रहने का मतलब है कि बैंक सस्ता और आसानी से कर्ज देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं होम और पर्सनल लोन लेने के मामले में भी पुरुषों से आगे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
वित्तीय समझदारी और साख के प्रति पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा सतर्क रहती हैं। इसलिए ज्यादा कर्ज के बावजूद उनका क्रेडिट स्कोर बेहतर रहता है। बैंकबाजार की मनीमूड-2022 रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में 36 फीसदी ही ऐसे लोग हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर 800 से ज्यादा है। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 40 फीसदी है, जबकि पुरुषों की 35.6 फीसदी ही है।
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क्रेडिट स्कोर का 800 से ज्यादा रहने का मतलब है कि बैंक सस्ता और आसानी से कर्ज देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं होम और पर्सनल लोन लेने के मामले में भी पुरुषों से आगे हैं। अक्तूबर, 2020 से सितंबर, 2021 के बीच हर महिला ने औसतन 29.65 लाख तक का होम लोन लिया, जबकि पुरुषों ने 26.99 लाख तक का। पसर्नल लोन के मामले में हर महिला ने जनवरी-दिसंबर, 2021 के बीच औसतन 1.87 लाख तक का कर्ज लिया। इस दौरान पुरुषों ने औसतन 1.86 लाख तक का पर्सनल लोन लिया।
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इस तरह महिलाओं पर कर्ज ज्यादा
| श्रेणी/लोन | होम लोन | पर्सनल लोन |
| ऑल इंडिया | 27.30 | 1.86 |
| मेट्रो शहर | 29.72 | 1.91 |
| नॉन-मेट्रो शहर | 21.60 | 1.73 |
| पुरुष | 26.99 | 1.86 |
| महिला | 29.65 | 1.87 |
(आंकड़े : अक्तूबर, 2020 से सितंबर, 2021 तक के, रकम : लाख में)
क्रेडिट स्कोर को लेकर नौकरीपेशा ज्यादा सतर्क
70 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर 700 से ज्यादा है। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 72 फीसदी है, जबकि पुरुषों की 66 फीसदी । इसमें आगे कहा गया है कि क्रेडिट स्कोर को लेकर नौकरीपेशा वाले लोग स्व-रोजगार वालों के मुकाबले ज्यादा सतर्क रहते हैं। 40 फीसदी नौकरीपेशा लोगों का क्रेडिट स्कोर 800 से ज्यादा है, जबकि स्व-रोजगार के मामले में यह संख्या 27.5 फीसदी है। 69.2 फीसदी नौकरीपेशा ऐसे हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर 700 से ज्यादा है। स्व-रोजगार करने वालों की संख्या 61.25 फीसदी है।
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दाम बढ़ने से फ्यूल कार्ड की मांग 10 गुना बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों की वजह से फ्यूल क्रेडिट कार्ड की मांग 10 गुना बढ़ गई है। कुल क्रेडिट कार्ड में फ्यूल कार्ड की हिस्सेदारी 8.15 फीसदी बढ़कर 13.1 फीसदी पहुंच गई है। पिछले साल यह आंकड़ा 4.95 फीसदी था। पेट्रोल पंपों पर फ्यूल क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर ग्राहकों को कीमतों में छूट के साथ रिवॉर्ड और अन्य लाभ मिलते हैं।