{"_id":"697159afd523f8dd1302f974","slug":"fertilizer-imports-will-reach-a-record-18-billion-in-the-current-fiscal-year-2026-01-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fertilizer: चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड $18 अरब पहुंचेगा उर्वरक आयात, बुवाई के रकबे में वृद्धि ने बढ़ाई खपत","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Fertilizer: चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड $18 अरब पहुंचेगा उर्वरक आयात, बुवाई के रकबे में वृद्धि ने बढ़ाई खपत
Thu, 22 Jan 2026 04:26 AM IST
लव गौर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: लव गौर
Updated Thu, 22 Jan 2026 04:26 AM IST
सार
सरकारी और उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने मुताबिक मानसून में अच्छी बारिश ने किसानों को बुवाई बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे इस साल उर्वरक की खपत पिछले वर्ष के मुकाबले कम-से-कम 5 फीसदी बढ़ सकती है।
विज्ञापन
उर्वरक की दुकान
- फोटो : विज्ञप्ति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश का उर्वरक आयात चालू वित्त वर्ष में 2024-25 के मुकाबले 76 फीसदी बढ़कर 18 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। सरकारी और उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने बुधवार को बताया, मानसून में अच्छी बारिश ने किसानों को बुवाई बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे इस साल उर्वरक की खपत पिछले वर्ष के मुकाबले कम-से-कम 5 फीसदी बढ़ सकती है।
एक अधिकारी ने बताया, खपत वृद्धि के कारण इस साल यूरिया और डीएपी (डायअमोनियम फॉस्फेट) के आयात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 13.98 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया गया, जो सालाना आधार पर 71 फीसदी अधिक है। आखिरी यानी मार्च तिमाही में भी बड़ी मात्रा में यूरिया और अन्य उर्वरकों के आयात होने का अनुमान है, जिसकी कीमत कम-से-कम 4 अरब डॉलर होगी। भारत ने 2024-25 में 10.23 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया था। 2022-23 में इस पर रिकॉर्ड 17.21 अरब डॉलर खर्च हुआ था, जब यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण उर्वरक की वैश्विक कीमतें बढ़ गई थीं।
6.52 करोड़ हेक्टेयर में बुवाई
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, किसानों ने अब तक 6.52 करोड़ हेक्टेयर में फसलों की बुवाई की है, जो पिछले साल की तुलना में 3.3 फीसदी अधिक है। इंडियन पोटाश के प्रबंध निदेशक पीएस गहलोत ने कहा, जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान औसत से 8 फीसदी अधिक बारिश हुई। अक्तूबर में सामान्य से 49 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जिससे गेहूं, रेपसीड व चने जैसी सर्दियों की फसलों की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी मिली।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Good News: अब खेतों में नहीं जलेगी पराली, फसलों के अवशेष से बनेगी बिजली, होंगे घर रोशन
61 फीसदी तक बढ़ सकता है यूरिया आयात
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन एस शंकरसुब्रमण्यम ने कहा, मक्के के उत्पादन ने भी यूरिया की खपत बढ़ाई है। यूरिया का आयात 61 फीसदी बढ़कर 90 लाख टन पहुंच सकता है। डीएपी में 52 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है और आयात 70 लाख टन पहुंच सकता है।
फसल सुरक्षा उत्पाद बेचने वाले ई-कॉमर्स के लिए सख्त हों नियम
कीटनाशक उद्योग ने सरकार से फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री करने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के लिए नियमों को सख्त करने की मांग की है। उद्योग का दावा है कि बुनियादी अनुपालन जांच अपर्याप्त हैं और किसानों तक नकली उत्पादों को पहुंचने से रोकने के लिए प्राधिकरण प्रमाण पत्र जारी करने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें: PM Kisan Yojana: दूसरों की जमीन पर खेती करने वाला किसान क्या ले सकता है इस स्कीम का लाभ?
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा, सरकार को मौजूदा कीटनाशक अधिनियम के तहत नियम जारी करने चाहिए और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक के मसौदे में ऑनलाइन बिक्री को विनियमित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल करने चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि उत्पादों की प्रामाणिकता और आपूर्ति श्रृंखला की पहचान को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। कीटनाशक विनियमित उद्योग है, और पूरी आपूर्ति श्रृंखला को नियामक ढांचे का पालन करना चाहिए। कृषि मंत्रालय के कृषि आयुक्त पी. के. सिंह ने कहा, खतरनाक कृषि इनपुट की ऑनलाइन बिक्री के मामले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों द्वारा विक्रेताओं के जीएसटी दस्तावेजों जैसी बुनियादी अनुपालन जांच पर्याप्त नहीं हो सकती हैं। मजबूत गुणवत्ता आश्वासन और पहचान की जरूरत भी है।
विज्ञापन
एक अधिकारी ने बताया, खपत वृद्धि के कारण इस साल यूरिया और डीएपी (डायअमोनियम फॉस्फेट) के आयात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 13.98 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया गया, जो सालाना आधार पर 71 फीसदी अधिक है। आखिरी यानी मार्च तिमाही में भी बड़ी मात्रा में यूरिया और अन्य उर्वरकों के आयात होने का अनुमान है, जिसकी कीमत कम-से-कम 4 अरब डॉलर होगी। भारत ने 2024-25 में 10.23 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया था। 2022-23 में इस पर रिकॉर्ड 17.21 अरब डॉलर खर्च हुआ था, जब यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण उर्वरक की वैश्विक कीमतें बढ़ गई थीं।
विज्ञापन
6.52 करोड़ हेक्टेयर में बुवाई
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, किसानों ने अब तक 6.52 करोड़ हेक्टेयर में फसलों की बुवाई की है, जो पिछले साल की तुलना में 3.3 फीसदी अधिक है। इंडियन पोटाश के प्रबंध निदेशक पीएस गहलोत ने कहा, जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान औसत से 8 फीसदी अधिक बारिश हुई। अक्तूबर में सामान्य से 49 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जिससे गेहूं, रेपसीड व चने जैसी सर्दियों की फसलों की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी मिली।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Good News: अब खेतों में नहीं जलेगी पराली, फसलों के अवशेष से बनेगी बिजली, होंगे घर रोशन
61 फीसदी तक बढ़ सकता है यूरिया आयात
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन एस शंकरसुब्रमण्यम ने कहा, मक्के के उत्पादन ने भी यूरिया की खपत बढ़ाई है। यूरिया का आयात 61 फीसदी बढ़कर 90 लाख टन पहुंच सकता है। डीएपी में 52 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है और आयात 70 लाख टन पहुंच सकता है।
फसल सुरक्षा उत्पाद बेचने वाले ई-कॉमर्स के लिए सख्त हों नियम
कीटनाशक उद्योग ने सरकार से फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री करने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के लिए नियमों को सख्त करने की मांग की है। उद्योग का दावा है कि बुनियादी अनुपालन जांच अपर्याप्त हैं और किसानों तक नकली उत्पादों को पहुंचने से रोकने के लिए प्राधिकरण प्रमाण पत्र जारी करने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें: PM Kisan Yojana: दूसरों की जमीन पर खेती करने वाला किसान क्या ले सकता है इस स्कीम का लाभ?
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा, सरकार को मौजूदा कीटनाशक अधिनियम के तहत नियम जारी करने चाहिए और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक के मसौदे में ऑनलाइन बिक्री को विनियमित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल करने चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि उत्पादों की प्रामाणिकता और आपूर्ति श्रृंखला की पहचान को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। कीटनाशक विनियमित उद्योग है, और पूरी आपूर्ति श्रृंखला को नियामक ढांचे का पालन करना चाहिए। कृषि मंत्रालय के कृषि आयुक्त पी. के. सिंह ने कहा, खतरनाक कृषि इनपुट की ऑनलाइन बिक्री के मामले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों द्वारा विक्रेताओं के जीएसटी दस्तावेजों जैसी बुनियादी अनुपालन जांच पर्याप्त नहीं हो सकती हैं। मजबूत गुणवत्ता आश्वासन और पहचान की जरूरत भी है।