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World Bank: भारत ने 2011 से 2023 के बीच 17 करोड़ से अधिक लोगों को घोर गरीबी से बाहर निकाला, विश्व बैंक का दावा

Sat, 07 Jun 2025 07:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 07 Jun 2025 07:17 PM IST
सार

विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है कि भारत ने 2011-12 से 2022-23 के बीच के दशक में 17.1 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Extreme poverty in India down to 5.3 pc in 2022-23: World Bank
World Bank, विश्व बैंक - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत की अत्यधिक गरीबी दर एक दशक में तेजी से घटकर 5.3 प्रतिशत हो गई है, यह 2011-12 में 27.1 प्रतिशत थी। यह टिप्पणी की है विश्व बैंक ने। वैश्विक संस्था ने अपनी गरीबी रेखा के दायरे को भी बढ़ाकर 3 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन कर दिया है। विश्व बैंक ने यह भी दावा किया है कि भारत ने 2011-12 से 2022-23 के बीच के दशक में 17.1 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है।

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जानिए तीन डॉलर प्रतिदिन से कम पर कितने लोग जीवनयापन कर रहे

विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट में कहा कि 2017 और 2021 के बीच भारत की मुद्रास्फीति दर को देखते हुए, 3 अमेरिकी डॉलर की संशोधित अत्यधिक गरीबी रेखा को आधार मानें तो भारत में गरीबी दर 5.3 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2024 में 54,695,832 लोग तीन डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवनयापन कर रहे थे।

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भारत में घोर घरीबी 16.2 प्रतिशत से घटकर 2.3% हो गई

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011-12 और 2022-23 के बीच अत्यधिक गरीबी की दर 16.2 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत हो गई। इस दौरान, निम्न मध्यम आय वाले देश (एलएमआईसी) में गरीबी दर में 33.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई। विश्व बैंक ने माना है कि मुफ्त और रियायती खाद्यान्न वितरण से से गरीबी में कमी आई है और ग्रामीण व शहरी गरीबी का अंतर कम हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में 54 प्रतिशत अत्यंत गरीब लोग रहते हैं।

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भारत की वास्तविक जीडीपी कोरोना के पहले के स्तर के 5 प्रतिशत कम

अर्थव्यवस्था के बारे में, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की वास्तविक जीडीपी वित्त वर्ष 2025 तक कोरोना के पहले के स्तर से लगभग 5 प्रतिशत कम है। विश्व बैंक ने यह भी कहा है कि यदि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं का व्यवस्थित ढंग से समाधान कर लिया जाता है तो 2027-28 तक भारत का विकास धीरे-धीरे अपनी संभावित स्थिति में पहुंच जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि, भारतीय आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण नकारात्मक जोखिम विद्यमान हैं, और इसका कारण वैश्विक स्तर पर नीतिगत बदलाव जारी रहना है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने से भारत के निर्यात की मांग कम होगी और निवेश में सुधार में और देरी होगी।"

वित्त वर्ष 2026-28 में चालू खाता घाटा

रिपोर्ट के अनुसार चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद के औसतन 1.2 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सकल घरेलू उत्पाद के 16 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने का अनुमान है। विश्व बैंक ने अप्रैल में भारत पर अपनी 'गरीबी और समानता संक्षिप्त रिपोर्ट' में कहा था, "पिछले एक दशक में भारत ने गरीबी को काफी हद तक कम किया है। अत्यधिक गरीबी (प्रतिदिन 2.15 अमेरिकी डॉलर से कम पर जीवनयापन) 2011-12 में 16.2 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 2.3 प्रतिशत हो गई है। इससे लगभग 17 करोड़ 10 लाख लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आ गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी घटकर 2.8% पर पहुंची

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी 18.4 प्रतिशत से घटकर 2.8 प्रतिशत हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह 10.7 प्रतिशत से घटकर 1.1 प्रतिशत हो गई है। जिससे ग्रामीण-शहरी अंतर 7.7 प्रतिशत से घटकर 1.7 प्रतिशत रह गया है। यह 16 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट है।

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