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विशेषज्ञ की राय: मध्य वर्ग पर केंद्रित यह बजट अर्थव्यवस्था को संतुलित करेगा, करदाताओं की क्रय शक्ति भी बढ़ेगी
सार
आपको याद होगा कि पिछले साल के आम चुनाव में इस वर्ग की निराशा भाजपा पर भारी पड़ी थी। इस वर्ग के लिए बढ़ती महंगाई से तालमेल बैठाना लगातार मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जरूरी था कि विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार मध्य वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाए।
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- फोटो : istock
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विस्तार
सरकार की इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि मध्य वर्ग को तोहफा देने के साथ ही उसने आम बजट में अर्थव्यवस्था में बेहतर संतुलन साधने की कोशिश की है। संतुलन का यह प्रयास राजकोषीय घाटे को घटाने में मदद करेगा, और मंदी के दौर में विकास दर को बनाए रखेगा। साथ ही विकसित भारत के लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास की राह में कोई रोड़ा नहीं अटकाएगा। आम बजट में जिस प्रकार बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी देने की घोषणा की गई है, उसके जरिये सरकार ने सुधार की राह में भी पहले की तरह ही आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया है।
सबसे पहले बात नौकरीपेशा और मध्य वर्ग को आय कर में अभूतपूर्व राहत देने की। आपको याद होगा कि पिछले साल के आम चुनाव में इस वर्ग की निराशा भाजपा पर भारी पड़ी थी। इस वर्ग के लिए बढ़ती महंगाई से तालमेल बैठाना लगातार मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जरूरी था कि विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार मध्य वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाए। सरकार ने जीएसटी में राहत नहीं देकर वाकई अच्छा फैसला किया है। किसानों के ऋण सुविधा को बढ़ाने की बात है। छोटे-मझले उद्योगों, स्टार्ट अप के लिए भी ऋण का दायरा बढ़ाया गया है। मुझे लगता है कि इन घोषणाओं का रोजगार के क्षेत्र में अच्छा असर दिखेगा। सेवा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
करदाताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी
आय कर में बड़ी राहत से भाजपा के साथ बाजार की जमीन भी मजबूत होगी। मध्य वर्ग की जेब में अब इतनी रकम होगी जिसे वह बाजार में खर्च कर सके। सरकार के इस फैसले ने हाल ही में आठवें वेतन आयोग के गठन के बावजूद सरकारी नौकरीपेशा वर्ग में उलझन की स्थिति को खत्म करेगा। दरअसल तब यह वर्ग सोचता था कि जितना ज्यादा पैसा उतना ज्यादा कर, फिर ऐसे प्रयासों का लाभ ही क्या है। अब इस फैसले के बाद स्थिति यह है कि देश का करीब अस्सी फीसदी करदाता इसके दायरे से बाहर हो जाएगा।
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(लेखक हाउस ऑफ लार्ड्स के पूर्व सदस्य रह चुके हैं)
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सबसे पहले बात नौकरीपेशा और मध्य वर्ग को आय कर में अभूतपूर्व राहत देने की। आपको याद होगा कि पिछले साल के आम चुनाव में इस वर्ग की निराशा भाजपा पर भारी पड़ी थी। इस वर्ग के लिए बढ़ती महंगाई से तालमेल बैठाना लगातार मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जरूरी था कि विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार मध्य वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाए। सरकार ने जीएसटी में राहत नहीं देकर वाकई अच्छा फैसला किया है। किसानों के ऋण सुविधा को बढ़ाने की बात है। छोटे-मझले उद्योगों, स्टार्ट अप के लिए भी ऋण का दायरा बढ़ाया गया है। मुझे लगता है कि इन घोषणाओं का रोजगार के क्षेत्र में अच्छा असर दिखेगा। सेवा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
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करदाताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी
आय कर में बड़ी राहत से भाजपा के साथ बाजार की जमीन भी मजबूत होगी। मध्य वर्ग की जेब में अब इतनी रकम होगी जिसे वह बाजार में खर्च कर सके। सरकार के इस फैसले ने हाल ही में आठवें वेतन आयोग के गठन के बावजूद सरकारी नौकरीपेशा वर्ग में उलझन की स्थिति को खत्म करेगा। दरअसल तब यह वर्ग सोचता था कि जितना ज्यादा पैसा उतना ज्यादा कर, फिर ऐसे प्रयासों का लाभ ही क्या है। अब इस फैसले के बाद स्थिति यह है कि देश का करीब अस्सी फीसदी करदाता इसके दायरे से बाहर हो जाएगा।
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(लेखक हाउस ऑफ लार्ड्स के पूर्व सदस्य रह चुके हैं)