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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Exclusive Interview of IOC President Sanjeev Singh Customer benefits from new oil sales policy

 साक्षात्कार: खुदरा तेल बिक्री की नई नीति से ग्राहक को लाभ

Mon, 04 Nov 2019 04:40 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: देव कश्यप Updated Mon, 04 Nov 2019 04:40 AM IST
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Exclusive Interview of IOC President Sanjeev Singh Customer benefits from new oil sales policy
संजीव सिंह, अध्यक्ष, आईओसी - फोटो : IOCL.Com

पेट्रोल-डीजल की खुदरा बिक्री से जुड़ी नीति बदलने का सबसे ज्यादा फायदा ग्राहक को होगा। हालांकि, सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का मानना है कि सरकार के इस फैसले से क्षेत्र में स्थापित कंपनियों केकारोबार पर असर पड़ सकता है। बावजूद इसके फैसले में कुछ अवसर भी छुपे हैं, जिसे बेेहतर तरीके से हासिल करने की जरूरत है। बदलते माहौल में कंपनी की रणनीति पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने आईओसी अध्यक्ष संजीव सिंह से बातचीत की। पेश हैं अंश :-

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केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की खुदरा बिक्री से संबंधित नीति में परिवर्तन कर दिया है। अब निजी खुदरा कंपनियां भी पेट्रोल पंप स्थापित कर सकती हैं। इसका क्या असर पड़ेगा?

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इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो ग्राहकों को ही फायदा होगा। जहां तक आईओसी की बात है, तो हम तो पहले से ही प्रतिस्पर्धा के माहौल में काम कर रहे हैं। हम तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच काम करते हैं। इस क्षेत्र में पहले से ही कई सरकारी, निजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं। अब अंतर यह होगा कि छोटे-छोटे खिलाड़ी भी मैदान में होंगे और उनका ध्यान सिर्फ रिटेल आउटलेट पर होगा। हमें तो रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, पाइप लाइन, क्रूड सोर्सिंग सहित अन्य कारोबार पर भी ध्यान देना है।

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इस फैसले से आपके डीलर दूसरी कंपनियों के पास जा सकते हैं?

यह विकल्प तो अभी भी उपलब्ध है। हमारे डीलर चाहें तो किसी निजी क्षेत्र की कंपनी के भी वितरक बन सकते हैं। बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो, इसके लिए हम सबको फलने-फूलने का अवसर देते हैं। जहां जिसको बेहतर कारोबार और विकास की संभावना मिलती है, वहां जा सकते हैं। हम किसी का रास्ता नहीं रोकते हैं। हम तो स्वागत करते हैं।बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए डीलर कहीं भी कारोबार कर सकते हैं।


अगले साल एक अप्रैल से देशभर में भारत स्टेज (बीएस) 6 मानक का ईंधन अनिवार्य हो रहा है। आपके यहां क्या तैयारी है?

हमारी कुछ रिफाइनरी में पूरी तरह से बीएस-6 ईंधन का उत्पादन शुरू हो गया है। कुछ में यह काम हो चुका है, जबकि कुछ में चल रहा है। जनवरी तक बरौनी और दिगबोई रिफाइनरी में यह काम पूरा हो रहा है जबकि मथुरा, गुवाहाटी, बोंगाइगांव में चरणबद्ध तरीके से शटडाउन लेकर काम शुरू होगा। हल्दिया में पहले से ही शटडाउन लेकर काम किया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि फरवरी तक हमारी सभी रिफाइनरी बीएस-6 ईंधन का उत्पादन करने लगेंगी।

तेल की मांग बढ़ेगी तो क्या प्रदूषण भी फैलता रहेगा?

बिल्कुल नहीं। जब बीएस-6 मानक के वाहन और ईंधन सब जगह अनिवार्य होंगे तो ऐसा नहीं होगा। इस मानक के डीजल इंजन को चाहे कार्य क्षमता के लिहाज से देखें या प्रदूषण मानक के हिसाब से, यह पेट्रोल से चलने वाले बीएस-6 इंजन के बराबर है। लिहाजा इनसे प्रदूषण शून्य रहेगा।


उज्ज्वला योजना से रसोई गैस घर-घर पहुंच गई है और बिजली कनेक्शन से भी लगभग सभी घर जुड़ गए हैं। ऐसे में मिट्टी तेल के उत्पादन की क्या रणनीति है?

जब मिट्टी तेल की मांग ही नहीं रहेगी तो इसका हम उत्पादन क्यों करेंगे। इसे बंद कर हम हवाई जहाज के ईंधन का उत्पादन बढ़ाएंगे। उड़ान योजना के बाद देश के कई छोटे शहरों तक हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं जिससे एटीएफ की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मिट्टी तेल की जगह हम पेट्रोकेमिकल्स बनाएंगे।


सड़क परिवहन मंत्रालय से लेकर नीति आयोग तक, सबका जोर ई-वाहन पर है। इससे पेट्रोल-डीजल की मांग में कमी तो नहीं आएगी?

मेरा आकलन है कि आने वाले 15-20 साल तक पेट्रोल या डीजल की मांग में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि और बढ़ेगी। अभी भारत में हर वर्ष पेट्रोल की मांग में 9-10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। डीजल की मांग भी बढ़ रही है। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों में 80 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है। जब पेट्रोल की बिक्री का आंकड़ा देखेंगे तो पाएंगे कि हम 65 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल दोपहिया वाहनों को बेचते हैं। इस समय दोपहिया वाहनों की ज्यादा बिक्री ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों में हो रही है। एक बार वाहन खरीदने वाले 15-20 साल तो चलाएंगे ही। यही हाल डीजल की खपत में भी है।

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