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Systematix: बढ़ती लागत व बदलते विकल्पों के बीच उपभोक्ता बाजार में मिला-जुला रुझान, जानिए रिपोर्ट में क्या दावा

Sat, 11 Apr 2026 03:43 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 11 Apr 2026 03:43 PM IST
सार

उपभोक्ताओं पर आधारित क्षेत्र पर इनपुट लागत, टियर 2-3 शहरों में विस्तार और मिडिल पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें।

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Evolving consumer choice and rising input cost may strain growth of consumer discretionary sector: Systematix
सिस्टेमेटिक्स की रिपोर्ट - फोटो : कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार।

विस्तार

ब्रोकरेज फर्म सिस्टेमैटिक्स की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, आने वाली तिमाहियों में कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी (उपभोक्ताओं पर आधारित) सेक्टर को विकास और चुनौतियां दोनों का सामना करना पड़ सकता है। उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं, कच्चे माल (इनपुट) की बढ़ती लागत और विनियामक दबावों के कारण इस सेक्टर की विकास दर और मुनाफे पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। 

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आभूषण और परिधान क्षेत्र में मजबूत बढ़त

वित्तीय वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में इस सेक्टर में कुल मिलाकर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। यह मुख्य रूप से वैल्यू अपैरल (किफायती परिधान) रिटेल, प्रीमियम फैशन और आभूषणों के मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित था।

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  • आभूषण: सोने की कीमतों में महंगाई, शादियों की मांग और त्योहारी खरीदारी के दम पर इस क्षेत्र ने असाधारण वृद्धि देखी है। हालांकि, उत्पाद मिश्रण में बदलाव के कारण मार्जिन में थोड़ी नरमी आ सकती है। सिस्टेमैटिक्स ने कहा, " वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में आभूषण उद्योग ने उल्लेखनीय लचीलापन और मजबूत विकास गति का प्रदर्शन किया है, जिसमें सोने की कीमतों में भारी अस्थिरता के बावजूद उपभोक्ता मांग मजबूत रही है"।
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  • परिधान: वैल्यू अपैरल खुदरा विक्रेताओं ने नए स्टोर के विस्तार और समान-स्टोर बिक्री में सुधार के माध्यम से मजबूत वृद्धि हासिल की। इसके साथ ही प्रीमियम ब्रांडों ने भी अपनी निरंतर गति बनाए रखी है। 

क्यूएसआर और बेवरेजेज: मार्जिन पर दबाव और अस्थिर मांग

अन्य उपभोक्ता खंडों में रिकवरी के संकेत तो हैं, लेकिन चुनौतियां भी बरकरार हैं:

  • क्विक सर्विस रेस्तरां: इस सेक्टर ने रिकवरी के शुरुआती संकेत दिए हैं, लेकिन मांग में अस्थिरता और एलपीजी (एलपीजी) आपूर्ति से संबंधित व्यवधानों के कारण मार्जिन लगातार दबाव में है। हालांकि कच्चे माल की स्थिर कीमतों के कारण ग्रॉस मार्जिन स्वस्थ रहा, लेकिन भारी छूट (डिस्काउंटिंग) और नकारात्मक परिचालन लीवरेज के कारण रेस्तरां का मुनाफा प्रभावित हुआ है।
  • अल्कोहलिक-बेवरेज: इस सेगमेंट में मिला-जुला प्रदर्शन रहा। नए उत्पादों के लॉन्च से 'प्रेस्टीज एंड अबव' सेगमेंट में दहाई अंकों की मजबूत वॉल्यूम वृद्धि देखी गई और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) कंपनियों ने ग्रोथ का नेतृत्व किया। इसके विपरीत, बीयर सेगमेंट का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। 

चुनौतियां: इनपुट लागत और मार्जिन पर उभरता जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में आक्रामक रहा है, जिससे राजस्व वृद्धि को तो समर्थन मिला है, लेकिन उच्च परिचालन लागत के कारण निकट अवधि की लाभप्रदता पर असर पड़ा है। भारी छूट और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन पर दबाव स्पष्ट रूप से उभर रहा है। पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत और एल्को-बेवरेज सेगमेंट में विनियामक चुनौतियां भी प्रमुख अड़चनें हैं।

परिधान क्षेत्र के लिए चेतावनी देते हुए सिस्टेमैटिक्स ने कहा, "पॉलिएस्टर की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण परिधान कंपनियों को संभावित मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर 1QFY27 से नतीजों पर पड़ सकता है, जब तक कि इन लागतों का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाला जाए"।

टियर-2 और टियर-3 शहर बनेंगे ग्रोथ इंजन

इन तमाम चुनौतियों के बीच, कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी सेक्टर की विकास गति जारी रहने की उम्मीद है। उपभोक्ता व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है; टियर-2 और टियर-3 शहरों में 'वन-स्टॉप शॉप्स' तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जो किफायती कीमतों पर विस्तृत रेंज पेश करते हैं। 



भविष्य के दृष्टिकोण से, ब्रोकरेज ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष खपत के लिए जोखिम पैदा करता है। वर्तमान मांग रिकवरी की स्थिरता बनाए रखने के लिए यह एक प्रमुख कारक है, जिस पर आगे कड़ी नजर रखने की आवश्यकता होगी।

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