बाजार का रुझान: इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश ₹29,329 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर, जानिए किस क्षेत्र का है दबदबा
अगस्त में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश 19% बढ़कर ₹29,329 करोड़ के 4 महीने के हाई पर पहुंचा। स्मॉलकैप व मिडकैप बने पहली पसंद, जबकि लार्जकैप से हुई निकासी। बाजार का पूरा एएमएफआई डेटा विश्लेषण पढ़ने के लिए अभी क्लिक करें।
विस्तार
भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में अगस्त का महीना निवेशकों के लिए काफी हलचल भरा रहा। अगस्त में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश 19 फीसदी की जोरदार बढ़त के साथ 29,329 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले चार महीनों का उच्चतम स्तर है। जहां एक तरफ स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी देखी गई, वहीं लार्जकैप फंडों से पूंजी बाहर निकलती नजर आई। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच यह रुझान स्पष्ट संकेत देता है कि निवेशक अब उच्च रिटर्न की उम्मीद में मिड और स्मॉल सेगमेंट पर दांव लगा रहे हैं।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में कितना आया निवेश और कौन-सी श्रेणियां रहीं आगे?
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में इक्विटी ओरिएंटेड योजनाओं में शुद्ध निवेश 29,328.62 करोड़ रुपये (लगभग 29,329 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया। इससे पहले जुलाई में यह आंकड़ा 24,697 करोड़ रुपये रहा था। अगस्त का यह इनफ्लो अप्रैल के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है, जब इक्विटी योजनाओं में 38,440 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश आया था। वहीं मई में 22,908 करोड़ रुपये और जून में 28,973 करोड़ रुपये का शुद्ध इनफ्लो दर्ज हुआ था।
कैटेगरी-वाइज प्रदर्शन देखें तो निवेशकों की पसंद स्पष्ट नजर आती है:
- स्मॉलकैप फंड: इक्विटी कैटेगरी में स्मॉलकैप फंड निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। अगस्त में इन फंडों में 7,973 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया।
- मिडकैप फंड: मिडकैप योजनाओं में भी मजबूत लिवाली देखी गई और इनमें 6,989 करोड़ रुपये का शुद्ध इनफ्लो दर्ज हुआ।
- लार्जकैप फंड: इसके ठीक विपरीत, लार्जकैप फंडों को लेकर निवेशकों का रुख सुस्त रहा और इस कैटेगरी से अगस्त में 1,147 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई।
कुल म्यूचुअल फंड उद्योग और डेट स्कीमों का कैसा रहा हाल?
भले ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में 19 फीसदी की तेजी आई हो, लेकिन पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल शुद्ध इनफ्लो में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अगस्त में पूरे उद्योग का शुद्ध निवेश घटकर 41,353 करोड़ रुपये रह गया, जबकि जुलाई में यह 2.36 लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर था।
उद्योग के कुल इनफ्लो में आई इस गिरावट की मुख्य वजह डेट आधारित योजनाओं से भारी निकासी रही:
- डेट स्कीमों से निकासी: अगस्त में डेट योजनाओं से 8,127 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई, जबकि जुलाई में इनमें 1.88 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश आया था।
- गोल्ड ईटीएफ की चमक: अनिश्चित माहौल में सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी रुझान बढ़ा। अगस्त में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में 2,597 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो जुलाई के 1,559 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।
इंडस्ट्री के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) पर इसका क्या असर पड़ा?
डेट स्कीमों से निकासी और कुल इनफ्लो में कमी के बावजूद म्यूचुअल फंड उद्योग के एसेट अंडर मैनेजमेंट (असेट अंडर मैनेजमेंट) में बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त के अंत में म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एयूएम बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गया। जुलाई के अंत में यह आंकड़ा 85.75 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि बाजार के पुनर्मूल्यांकन और निरंतर रिटेल भागीदारी के बल पर निवेशकों का कुल पोर्टफोलियो मजबूत बना हुआ है।
अगस्त के आंकड़े साफ करते हैं कि भारतीय रिटेल निवेशक स्मॉल और मिडकैप शेयरों की वृद्धि क्षमता पर अपना भरोसा बनाए हुए हैं। हालांकि लार्जकैप से निकासी और डेट फंडों में उतार-चढ़ाव यह संकेत भी देते हैं कि निवेशक सतर्कता के साथ पोर्टफोलियो का पुनर्संतुलन कर रहे हैं। आगामी महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्मॉलकैप-मिडकैप का यह दबदबा कायम रहता है या निवेशक वापस लार्जकैप की ओर रुख करते हैं।