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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Employment Report 2024 Earnings decreased in 12 years Monthly earnings of regular salary earners decreasing

Report: घट रही है नियमित वेतन पाने वालों की मासिक कमाई, 12 वर्षों में 12,100 से घटकर 10,925 रुपये रह गई आय

Sun, 31 Mar 2024 06:39 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 31 Mar 2024 06:39 AM IST
सार

रिपोर्ट कहती है कि भारत में श्रमिकों को उनके कौशल के आधार पर न्यूनतम मेहनताना नहीं मिल  है। श्रमिकों के एक बड़े हिस्से, विशेष रूप से आकस्मिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा।

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Employment Report 2024 Earnings decreased in 12 years Monthly earnings of regular salary earners decreasing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : YouTube

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय संगठन (आईएलओ) और मानव विकास संस्थान (आईएचडी) की नई रिपोर्ट ‘इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024’ के अनुसार भारत में नियमित वेतन पाने वालों और स्व-रोजगार में लगे लोगों की वास्तविक कमाई में पिछले एक दशक के दौरान गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में वास्तविक कमाई का आकलन महंगाई (मुद्रास्फीति) के आधार पर किया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार साल दर साल नियमित कर्मचारियों के औसत मासिक वास्तविक कमाई में लगातार गिरावट आई है। 2012 में नियमित कर्मचारियों की औसत मासिक कमाई 12,100 रुपये थी। अब यह सालाना 1.2 फीसदी की गिरावट के साथ 2019 में घटकर 11,155 रुपये प्रतिमाह हो गई। 2022 में यह 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 10,925 रुपये मासिक रह गया।
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आकस्मिक श्रमिकों की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई
रिपोर्ट के अनुसार आकस्मिक श्रमिकों के मामले में उलट स्थिति सामने आई है। यानी पिछले दशक के दौरान उनकी वास्तविक कमाई में वृद्धि दर्ज की गई है। 2012 में इनकी औसत मासिक वास्तविक आय 3,701 रुपये थी जो सालाना 2.4 फीसदी की वृद्धि के साथ 2019 में बढ़कर 4,364 रुपये तथा 2022 में 4712 रुपये हो गई प्रतिमाह हो गई। नियमित कर्मचारियों और स्वरोजगार से संबद्ध लोगों की घटती कमाई के साथ ही आकस्मिक श्रमिकों की आय में हुई बढ़ोतरी का अर्थ यह है कि  2000 से 2022 के बीच पैदा हुई नौकरियों की गुणवत्ता पैमाने पर खरी नहीं थी।
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खेती-बाड़ी से जुड़े मजदूरों को नहीं मिल रहा न्यूनतम मेहनताना
रिपोर्ट कहती है कि भारत में श्रमिकों को उनके कौशल के आधार पर न्यूनतम मेहनताना नहीं मिल  है। श्रमिकों के एक बड़े हिस्से, विशेष रूप से आकस्मिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा। राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में 40.8 फीसदी नियमित श्रमिकों और 51.9 फीसदी आकस्मिक श्रमिकों को उतना पारिश्रमिक नहीं मिल रहा जितना उस क्षेत्र में किसी अकुशल श्रमिक के लिए प्रतिदिन के लिहाज से कम से कम तय किया गया है।

इसके अलावा रिपोर्ट में निर्माण क्षेत्र में लगे श्रमिकों की कमाई का भी उल्लेख किया गया है। इस क्षेत्र से जुड़े 39.3 फीसदी नियमित कर्मचारियों और 69.5 फीसदी आकस्मिक श्रमिकों को अकुशल श्रमिकों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से निर्धारित औसत न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। यह आंकड़े 2022 के लिए किए गए पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे पर आधारित हैं।


स्वरोजगार में लगे लोगों की कमाई भी घटी
कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा जो स्व रोजगार में लगा हुआ है उनकी कमाई भी कम हुई है। इनकी वास्तविक कमाई में सालाना 0.8 फीसदी की गिरावट आई है। यह 2019 में करीब 7,017 रुपये प्रतिमाह से घटकर 2022 में 6,843 रुपये प्रतिमाह रह गई।
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