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Embraer: भारत में संभावनाएं तलाश रही विमान बनाने वाली कंपनी एंबरेयर, इंडिगो और एयर इंडिया से कर रही बात
Mon, 02 Jun 2025 11:57 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 02 Jun 2025 11:57 AM IST
सार
अभी एंबरेयर के लिए सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और साल 2024 में अमेरिका से ही कंपनी को सबसे ज्यादा राजस्व मिला था। हालांकि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति से कंपनी की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं नागरिक उड्डयन के मामले में अब भारत दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। यही वजह है कि एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब भारत का रुख कर रही हैं।
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एंबरेयर कंपनी का विमान
- फोटो : एंबरेयर एविएशन
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विस्तार
ब्राजील की विमान बनाने वाली कंपनी एंबरेयर का फोकस अब भारत पर है। एंबरेयर ने कहा है कि उन्हें भारत के विशाल बाजार में कमर्शियल, बिजनेस और सैन्य विमानों के लिए बड़ा बाजार दिखाई दे रहा है। कंपनी के सीईओ फ्रैंकोइस गोम्स नेटो इन दिनों भारत दौरे पर हैं। नई दिल्ली में इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की बैठक में शामिल होने आए नेटो ने कहा कि उनकी कंपनी विमानों की खरीद के लिए भारतीय एयरलाइंस जैसे इंडिगो और एयर इंडिया के साथ बातचीत कर रही है।
भारत में पैर जमाना चाहती है एंबरेयर
भारत में संभावनाओं को देखते हुए एंबरेयर ने नई दिल्ली में अपना कॉरपोरेट ऑफिस भी खोला है। एंबरेयर अपने ई-2 विमानों को भारत में बेचने की कोशिश कर रही है, जो 146 सीटों वाला विमान है। नेटो ने बताया कि एंबरेयर ने भारत में विमानों के बाजार को देखते हुए एक अधिग्रहण टीम नियुक्त की है। साथ ही कंपनी ने सरकार से संपर्क के लिए, संचार, इंजीनियरिंग, सेल्स और मार्केटिंग के लिए भी टीमें नियुक्त कर दी हैं। अभी भी भारत में एंबरेयर के 50 से ज्यादा विमान भारत में संचालित हो रहे हैं। ये विमान कमर्शियल, बिजनेस वर्ग के साथ ही रक्षा क्षेत्र में भी संचालित हैं। क्षेत्रीय विमानन कंपनी स्टार एयर के पास एंबरेयर विमान हैं। नेटो ने बताया कि उनकी कंपनी भारत में ही मेंटिनेंस के लिए अपना केंद्र स्थापित करने पर भी विचार कर रही है, लेकिन ये विमानों की बिक्री पर निर्भर करेगा।
ये भी पढ़ें- निवेश मंत्रा: दो दिन पहले शेयर खरीदकर भी पा सकते हैं बोनस-लाभांश, इन कंपनियों के शेयरधारकों को होगा बड़ा फायदा
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भारत के रक्षा क्षेत्र में एंबरेयर की अच्छी-खासी उपस्थिति
बीते साल ही एंबरेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटीज ने भारतीय कंपनी महिंद्रा डिफेंस सिस्टम के साथ समझौता किया है। दोनों कंपनियां मिलकर भारतीय सुरक्षा बलों के लिए मीडिया ट्रांसपोर्ट विमान बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। अभी भी भारतीय सशस्त्र बलों में एंबरेयर के 600 लेगेसी विमान इस्तेमाल हो रहे हैं। जो भारतीय वायुसेना, बीएसएफ द्वारा सरकारी अधिकारियों और वीआईपी लोगों की यात्राओं में इस्तेमाल होते हैं।
अभी एंबरेयर के लिए सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और साल 2024 में अमेरिका से ही कंपनी को सबसे ज्यादा राजस्व मिला था। हालांकि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति से कंपनी की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं नागरिक उड्डयन के मामले में अब भारत दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। यही वजह है कि एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब भारत का रुख कर रही हैं।
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भारत में पैर जमाना चाहती है एंबरेयर
भारत में संभावनाओं को देखते हुए एंबरेयर ने नई दिल्ली में अपना कॉरपोरेट ऑफिस भी खोला है। एंबरेयर अपने ई-2 विमानों को भारत में बेचने की कोशिश कर रही है, जो 146 सीटों वाला विमान है। नेटो ने बताया कि एंबरेयर ने भारत में विमानों के बाजार को देखते हुए एक अधिग्रहण टीम नियुक्त की है। साथ ही कंपनी ने सरकार से संपर्क के लिए, संचार, इंजीनियरिंग, सेल्स और मार्केटिंग के लिए भी टीमें नियुक्त कर दी हैं। अभी भी भारत में एंबरेयर के 50 से ज्यादा विमान भारत में संचालित हो रहे हैं। ये विमान कमर्शियल, बिजनेस वर्ग के साथ ही रक्षा क्षेत्र में भी संचालित हैं। क्षेत्रीय विमानन कंपनी स्टार एयर के पास एंबरेयर विमान हैं। नेटो ने बताया कि उनकी कंपनी भारत में ही मेंटिनेंस के लिए अपना केंद्र स्थापित करने पर भी विचार कर रही है, लेकिन ये विमानों की बिक्री पर निर्भर करेगा।
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भारत के रक्षा क्षेत्र में एंबरेयर की अच्छी-खासी उपस्थिति
बीते साल ही एंबरेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटीज ने भारतीय कंपनी महिंद्रा डिफेंस सिस्टम के साथ समझौता किया है। दोनों कंपनियां मिलकर भारतीय सुरक्षा बलों के लिए मीडिया ट्रांसपोर्ट विमान बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। अभी भी भारतीय सशस्त्र बलों में एंबरेयर के 600 लेगेसी विमान इस्तेमाल हो रहे हैं। जो भारतीय वायुसेना, बीएसएफ द्वारा सरकारी अधिकारियों और वीआईपी लोगों की यात्राओं में इस्तेमाल होते हैं।
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अभी एंबरेयर के लिए सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और साल 2024 में अमेरिका से ही कंपनी को सबसे ज्यादा राजस्व मिला था। हालांकि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति से कंपनी की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं नागरिक उड्डयन के मामले में अब भारत दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। यही वजह है कि एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब भारत का रुख कर रही हैं।