आर्थिक सर्वेक्षण : कर्मचारियों को बनाएं बैंकों में हिस्सेदार, सुधरेगा प्रदर्शन
आर्थिक सर्वेक्षण में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों को भी उनमें हिस्सेदार बनाने यानी शेयरों (ईसॉप) की पेशकश किए जाने की वकालत की है, जिससे वह ज्यादा जिम्मेदारी से काम कर सकें। इसमें कहा गया कि जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हुआ, उस तरह से यहां के बैंकिंग क्षेत्र का विकास नहीं हो सका। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन यहां का एक भी बैंक दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल नहीं है।
देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) का स्थान भी दुनिया में 55वां है, जिसकी वजह सरकारी बैंकों की कार्यशैली है। देश की बैंकिंग व्यवस्था में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 70 फीसदी की है, लेकिन ये बैंक कारोबारी रूप से सफल नहीं हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक कितने कुशल हैं, इस पर समीक्षा में एक तुलनात्मक अध्ययन किया है। 2019 में सरकारी बैंकों का संयुक्त घाटा 66 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का रहा है।
कर्मचारी शेयर विकल्प की पेशकश की सलाह, ताकि जिम्मेदारी से कर सकें काम
इसका मूल कारण खराब कर्ज खाते हैं, जिसकी वजह से वह एनपीए बन गया। यह रकम शिक्षा पर आवंटित राशि की तुलना में दोगुनी है। देश में जितने बैंक फ्रॉड होते हैं, उसमें से 85 फीसदी मामले सरकारी बैंकों के होते हैं और उनका सकल एनपीए 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत है और बैंक के हर काम में फिनटेक का उपयोग हो।