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आर्थिक सर्वेक्षण: भारतीय बाजारों में बढ़ा लचीलापन, इको सर्वे ने 2025 में सार्थक बाजार सुधार के प्रति किया आगाह

Fri, 31 Jan 2025 04:21 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 31 Jan 2025 04:21 PM IST
सार

भारत में खुदरा निवेशकों की भागीदारी खासकर युवा निवेशकों की बढ़ी है। 2020 में जहां निवेशक 4.9 करोड़ थे, वहीं 31 दिसंबर 2024 तक यह संख्या बढ़कर 13.2 करोड़ हो गई। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी बाजार में जो आशावादी भावना है और वहां के बढ़े हुए मूल्यांकन, 2025 में एक बड़ा सुधार ला सकते हैं।

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Economic Survey Indian markets have increased resilience, Eco Survey warns of meaningful market reform in 2025
भारतीय शेयर बाजार (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

शुक्रवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि शेयर बाजार में मूल्यांकन बढ़ने के बावजूद भारत को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका के बाजारों में अगर कोई सुधार होता है, तो उसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। खासकर, कोविड-19 के बाद भारत में युवा निवेशकों की संख्या बढ़ी है, जो शेयर बाजार में सक्रिय हो गए हैं। 
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खुदरा निवेश पर युवा निवेशकों की बढ़ोतरी
आखिरी कुछ वर्षों पर नजर डाले तो भारत में खुदरा निवेशकों की भागीदारी खासकर युवा निवेशकों की बढ़ी है। 2020 में जहां निवेशक 4.9 करोड़ थे, वहीं 31 दिसंबर 2024 तक यह संख्या बढ़कर 13.2 करोड़ हो गई। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी बाजार में जो आशावादी भावना है और वहां के बढ़े हुए मूल्यांकन, 2025 में एक बड़ा सुधार ला सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो यह भारत में युवा और नए निवेशकों पर ज्यादा प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर ने पहले कभी बड़े बाजार सुधार नहीं देखे हैं।
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अमेरिकी बाजरों की तुलना में ज्यादा लचीला 
हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि भारतीय बाजार अमेरिकी बाजारों के मुकाबले ज्यादा लचीले साबित हुए हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2024 में जब विदेशी निवेशकों ने भारत से 11 बिलियन डॉलर निकाल लिए, तो भी भारतीय बाजार में गिरावट कम रही। वहीं, मार्च 2020 में महामारी के कारण हुए संकट में 8 बिलियन डॉलर के एफपीआई बहिर्वाह के बावजूद भारतीय बाजारों में भारी गिरावट आई थी। इसलिए, जबकि भारतीय बाजारों की लचीलापन बढ़ी है और निवेशक आशावादी हैं, फिर भी अमेरिकी बाजार में सुधार से जुड़ी संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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इक्विटी बाजार पर एक नजर
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारतीय इक्विटी बाजार अमेरिकी बाजारों के उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील रहा है। ऐतिहासिक डेटा के अनुसार, जब अमेरिकी बाजार एसएंडपी 500 में 10% से अधिक गिरावट आई, तो निफ्टी 50 ने लगभग सभी मामलों में नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया। औसतन, निफ्टी 50 में 10.7% की गिरावट आई। वहीं, जब भारतीय बाजार निफ्टी 50 में 10% से ज्यादा गिरावट आई, तो अमेरिकी बाजार एसएंडपी 500 ने 13 बार सकारात्मक रिटर्न दिखाया, लेकिन इसका औसत रिटर्न -5.5% रहा।

साथ ही सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि भारतीय पूंजी बाजार देश के विकास की कहानी के केंद्र में हैं। ये पूंजी निर्माण को बढ़ावा देते हैं, घरेलू बचत को वित्तीय रूप में बदलते हैं, और धन सृजन को सक्षम बनाते हैं।


भारतीय शेयर बाजार की ऊंचाई
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 तक, भारतीय शेयर बाजार ने कई चुनौतियों के बावजूद नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है। इनमें भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, मुद्रा अवमूल्यन और घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं शामिल थीं। इस सफलता में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का बड़ा योगदान रहा है, क्योंकि वित्त वर्ष 2020 में जहां निवेशक 4.9 करोड़ थे, वहीं 31 दिसंबर 2024 तक यह संख्या बढ़कर 13.2 करोड़ हो गई है। 
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