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आर्थिक सुस्ती से 2019-20 में कम पैदा होंगे 16 लाख रोजगार: SBI

Mon, 13 Jan 2020 05:05 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 13 Jan 2020 05:05 PM IST
सार

  • यूपी-बिहार सहित कुछ राज्यों पर ज्यादा असर
  • 73.90 लाख नौकरियां चालू वित्त वर्ष में आने का अनुमान
  • 89.7 लाख नौकरियां आई थीं पिछले वित्त वर्ष

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economic slowdown may affect job creation by 16 lakh, says sbi ecorap report

विस्तार

अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती का असर रोजगार क्षेत्र पर भी गहरा असर डालने वाला है। एसबीआई ने सोमवार को अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट इकोरैप में अनुमान जताया है कि आर्थिक सुस्ती की वजह से चालू वित्त वर्ष में करीब 16 लाख रोजगार कम आएंगे। इस दौरान यूपी, बिहार जैसे राज्यों पर रोजगार की कमी का ज्यादा असर दिखेगा। 

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अभी तक 43.1 लाख लोगों को मिली नौकरी

इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में ईपीएफओ ने देशभर में 89.7 लाख नए लोगों का पंजीकरण किया। उस दौरान विकास दर करीब सात फीसदी थी, जबकि 2019-20 में विकास दर पांच फीसदी से भी नीचे जाने की आशंका है। इस सुस्ती से चालू वित्त वर्ष में 15.8 लाख रोजगार कम आने की आशंका है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) 15 हजार प्रतिमाह से कम वेतन वाले श्रमिकों का पंजीकरण करता है। अप्रैल-अक्तूबर 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 43.1 लाख रोजगार सृजन हुआ, जो वित्त वर्ष की समाप्ति तक 73.9 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। 

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यूपी-बिहार के श्रमिकों ने कम भेजे पैसे

एसबीआई के अनुसार, इस साल देखा गया है कि असम, राजस्थान, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों में श्रमिकों के पैसे घर भेजने की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। यहां से बड़ी संख्या लोग रोजगार की तलाश में पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली आते हैं। रोजगार मिलने पर पर ये लोग अपने परिवार के पास बड़ी मात्रा में पैसे भेजते हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इन पैसों की औसत वृद्धि 9.4-9.9 फीसदी पर टिकी है। यह दर्शाता है कि श्रमिकों की वेतन वृद्धि काफी धीमी हो रही है और नए रोजगार में ज्यादा बढ़ोतरी भी नहीें हुई। 

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सरकारी नौकरियों में भी कमी 

ईपीएफओ किसी भी तरह की सरकारी और निजी नौकरियों का आंकड़ा नहीं जुटाता है, बल्कि इन आंकड़ों को रखने का काम 2004 से नेशनल पेंशन स्कीम को सौंप दिया गया है। एसबीआई ने कहा, एनपीएस श्रेणी के रोजगार सृजन में भी बड़ी गिरावट दिखाई दे रही है। अभी तक के प्रदर्शन के आधार पर अनुमान है कि केंद्र और राज्य सरकारें 2019-20 में नई नौकरियों की संख्या 39,000 की कटौती कर सकती हैं। 

उद्योगों में घट गई श्रमिकों की मांग

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत में छाई सुस्ती की वजह से नए श्रमिकों की मांग लगातार घट रही है। कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, जिनके समाधान में देरी की वजह से ठेके पर श्रमिकों की भर्ती में बड़ी गिरावट आई है। कंपनियों की ओर से श्रमिकों के वेतन में कम बढ़ोतरी भी चिंता का विषय है। इस कदम से अधिक कर्ज लेने की दर बढ़ने का खतरा है, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय तंत्र के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। 

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