DHFL Case: दिल्ली की अदालत ने वधावन बंधुओं की जमानत अर्जी खारिज की, जानें पूरा मामला
DHFL Case: डीएचएफएल बैंक फ्रॉड मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बधावन बंधुओं को 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने मामले में 60 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं करने के कारण कोर्ट से जमानत देने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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दिल्ली की एक अदालत ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के पूर्व प्रवर्तकों कपिल वधावन और उनके भाई धीरज की ओर से करोड़ों रुपये की गड़बड़ी मामले में दाखिल जमानत याचिका खारिज कर दी है।
बता दें कि दोनों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने करोड़ों रुपये के बैंक कर्ज घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को बीते 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
आरोपियों की ओर से अदालत में दावा किया गया था कि सीबीआई उनकी गिरफ्तारी से 60 दिन की अनिवार्य अवधि के अंदर उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं कर सकी है, ऐसे में उन्हें इस मामले में वैधानिक जमानत या ‘डिफॉल्ट’ जमानत का अधिकार है।
हालांकि विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि जांच में मौजूदा आरोपपत्र दायर करना दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167 (2)(ए)(आई) के तहत रहेगा जिसमें अधिकतम 90 दिन की अवधि का प्रावधान है।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ धारा 409 (लोक सेवक या बैंकर, व्यापारी या एजेंट की ओर से किए गए आपराधिक विश्वासघात) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था जिसके लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है।
बता दें कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर डीएचएफएल, उसके तत्कालीन अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कपिल वधावन, तत्कालीन निदेशक धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले 17 बैंकों के समूह के साथ धोखाधड़ी की है।