सुस्ती के बाद भी G-20 देशों से ज्यादा है भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दरः वित्त मंत्री
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से विकास दर में कमी आई है। हालांकि अभी भी विकास दर G-20 देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
विकास दर में हुई है गिरावट
लोकसभा में केरल के सांसद एनके प्रेमचंद्रन के एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने माना कि विकास दर में गिरावट हुई है। हालांकि विश्व आर्थिक मंच ने जिस विकास दर का अनुमान लगाया है, वो विकसित देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। विकास दर को मजबूती देने के लिए सरकार ने पिछले तीन माह में कई कदम उठाए हैं। सरकार अलग-अलग सेक्टर के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी चिंता के बारे में जान रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सुधार के कदम उठा रही है, ताकि निवेश के माहौल को बेहतर बनाया जा सके।
नोटबंदी सरकार का सही फैसला
वहीं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी को सरकार का सही फैसला बताया। नोटबंदी से देश में करदाताओं की संख्या बढ़ी है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने सदन को बताया कि भारत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और इसमें विकास हो रहा है।
शीत सत्र के पहले दिन प्रश्न काल के दौरान अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए कई जरूरी कदम उठा रही है। इनमें बैंको के विलय और उद्योगों को कर राहत शामिल हैं।
पांच फीसदी गिरावट के दावे को गलत करार देते हुए अनुराग ठाकुर ने आप सांसद भगवंत मान से पूछा कि दिखायें कि ये आंकड़े कहां से मिले। उन्होंने कहा, जहां दुनिया के कई देश मंदी से जूझ रहे हैं भारत अब भी आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और 2025 तक यह पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
करदाता दोगुने हुए, कालाधन पर कसी नकेल
अनुराग ने सदन को बताया कि कालाधन पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी समेत कई सख्त कदम उठाये गए हैं। साथ ही कर दाताओं की संख्या में भी दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक 2014-19 के बीच जीडीपी में औसत 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो जी-20 देशों में सर्वाधिक है।
पांच सालों में निवेश का माहौल बनाया
केंद्रीय मंत्री ने कहा, सरकार ने देश में निवेश का बेहतर माहौल कायम करने के लिए कई जरूरी कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा, 2016 में दिवाला और दिवालियापन कानून लाना इसका सबसे अहम उदाहरण है।