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साइबर हमला: 45 लाख यात्रियों के क्रेडिट कार्ड के साथ निजी जानकारियां चोरी, क्या हो सकता है ऑनलाइन फ्रॉड?
Sat, 22 May 2021 12:08 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 22 May 2021 12:08 PM IST
सार
एयर इंडिया के 45 लाख यात्रियों के क्रेडिट कार्ड के साथ हैकरों ने निजी जानकारियां चुरा ली हैं। इसलिए यात्री परेशान हैं कि कहीं वे ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार न हो जाएं।
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एयर इंडिया
- फोटो : PTI
विस्तार
एयर इंडिया के यात्री सेवा प्रणाली प्रदाता एसआईटीए ने इस वर्ष फरवरी में एक साइबर हमले का सामना किया। इसकी वजह से 45 लाख यात्रियों के व्यक्तिगत डाटा लीक हो गए। यात्रियों के क्रेडिट कार्ड के साथ हैकरों ने निजी जानकारियां भी चुराई। एयर इंडिया द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि 11 अगस्त 2011 और तीन फरवरी 2021 के बीच एयर इंडिया के निश्चित संख्या में यात्रियों की निजी जानकारी लीक हुई है, जिसमें नाम, जन्म तिथि, मोबाइल या फोन नंबर, पासपोर्ट जानकारी, टिकट जानकारी और क्रेडिट कार्ड डाटा शामिल है। यह अत्यंत चिंता का विषय है। यात्री परेशान हैं कि कहीं वे ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार न हो जाएं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अब यात्री क्या करें?
एयर इंडिया ने कहा है कि, 'हम और हमारे डाटा प्रोसेसर लगातार सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं। हम यात्रियों से अपील करेंगे कि वे अपने व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, पासवर्ड बदल लें।'
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क्या हो सकता है ऑनलाइन फ्रॉड?
एयर इंडिया ने कहा है कि साइबर हमले में क्रेडिट कार्ड पर लिखे नाम, कार्ड नंबर, एक्सपायर डेट चोरी हो गई हैं, लेकिन डाटा प्रोसेसर के पास कार्ड का सीवीवी नंबर दर्ज नहीं किया जाता है, इसलिए कार्ड के सीवीवी नंबर की चोरी नहीं हुई। ऐसे में क्रेडिट कार्ड ब्योरे का इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड में नहीं हो सकता है।
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किसकी होती है सुरक्षा की जिम्मेदारी?
फरवरी के आखिरी सप्ताह में स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित एसआईटीए के सर्वर पर यह साइबर हमला हुआ। एसआईटीए यात्री सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एयर इंडिया की तरफ से डाटा प्रोसेसर का काम करता है। यात्रियों के डाटा को अपने सर्वर पर आगे सेवाएं देने के लिए सेव करने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी एसआईटी की ही होती है। एसआईटीए ने डाटा लीक की पहली सूचना 25 फरवरी को दी थी।
कैसे हो रही है मामले की जांच?
फोरेंसिक विश्लेषण के माध्यम से इसके स्तर और दायरे का पता लगाया जा रहा है और कवायद जारी है। एसआईटीए ने इसकी पुष्टि की है कि घटना के बाद सिस्टम के बुनियादी ढांचे के अंदर किसी भी अनधिकृत गतिविधि का पता नहीं चला है।
क्या कदम उठाए गए?
साइबर हमले के बाद हमले का शिकार होने वाले सर्वरों को सुरक्षित किया गया। बाहरी डाटा सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ संपर्क किया गया। इसकी जानकारी क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों को भी दी गई।
साथ ही एयर इंडिया फ्रिक्वेंट फ्लायर प्रोग्राम के पासवर्ड भी बदले गए।