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चालू वित्त वर्ष : पहली छमाही में सरकार का खर्च 18.24 लाख करोड़, राजस्व 12.03 लाख करोड़

Tue, 01 Nov 2022 05:16 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 01 Nov 2022 05:16 AM IST
सार

देश की अर्थव्यवस्था सितंबर महीने में तेज रही है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार की कोयला, खाद, सीमेंट और बिजली के बेहतर प्रदर्शन से देश के 8 प्रमुख सेक्टरों का उत्पादन सितंबर में 7.9% बढ़ा है।

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Current financial year: Central Govt expenditure 18.24 lakh crore in first half, revenue 12.03 lakh crore
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : i stock

विस्तार

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान सरकार ने 18.24 लाख करोड़ रुपये खर्च किया है। इसी दौरान इसका राजस्व 12.03 करोड़ रहा है। इससे राजकोषीय घाटा सालाना आधार पर बढ़कर 6,19,849 करोड़ हो गया है। एक साल पहले 5.27 लाख करोड़ था। 

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कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे साल के लक्ष्य का यह 37.3% है जबकि बजट अनुमान का यह 35% है। सरकार की प्राप्ति और उसके खर्च के बीच का जो अंतर है, उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं। सरकार को इस दौरान कुल 12.03 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला जिसमें टैक्स भी शामिल है। 
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सालाना आधार पर यह 9.5% अधिक जबकि  बजट अनुमान का 52.7% है। इस साल कुल रकम में टैक्स का हिस्सा 10.11 लाख करोड़ रुपये था जो बजट अनुमान का 52.3% है। केंद्र सरकार का खर्च इस दौरान 2022-23 के बजट अनुमान का 46.2% रहा है। 2022-23 के लिए सरकार ने 16.61 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटा का अनुमान लगाया है। 
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8 कोर सेक्टरों का उत्पादन सितंबर में 7.9% बढ़ा
देश की अर्थव्यवस्था सितंबर महीने में तेज रही है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार की कोयला, खाद, सीमेंट और बिजली के बेहतर प्रदर्शन से देश के 8 प्रमुख सेक्टरों का उत्पादन सितंबर में 7.9% बढ़ा है। एक साल पहले समान अवधि में इन उद्योगों की वृद्धि दर 5.4% रही थी। इस साल अगस्त में यह 4.1% थी। 

  • पहली छमाही में सभी का उत्पादन 9.6% बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष की समान छमाही में यह 16.9%तेजी में था। कोर सेक्टर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख उद्योग होते हैं। इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी होते हैं।

पूरे साल में 40 लाख करोड़ के खर्च का अनुमान 
घाटे की कुल रकम में से 4.36 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान पर और 1.98 लाख करोड़ रुपये बड़ी सब्सिडी का हिस्सा था। सरकार ने ज्यादातर खर्च सितंबर तिमाही में किया है। तमाम अर्थशास्त्री का मानना है कि सरकार का खर्च इस साल 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है जो एक साल पहले की तुलना में 4 फीसदी अधिक होगा। सब्सिडी पर ज्यादा खर्च हो रहा है। 

आईएमएफ के अनुमान से ज्यादा रहेगी अगले साल विकास दर
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि अगले साल भारत की विकास दर अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष (आईएमएफ) के अनुमान से ज्यादा रहेगा। आईएमएफ ने इस साल 6.8 फीसदी और अगले साल 6.1 फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें आने वाले सालों में वृद्धि दर इस अनुमान से कहीं अधिक रहने की उम्मीद है।

एक दशक तक सुस्त रहने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक डिजिटल ढांचे ने एक स्तर को पार कर लिया है और यह देश की अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के साथ ही ऊंची वृद्धि दर में भी योगदान देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में छह फीसदी के बुनियादी आंकड़े में 0.5-0.8 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। राजकोषीय नीति और मौद्रिक नीति में आमतौर पर एक-दूसरे से तालमेल होता है।

इस साल 44% बढ़ सकती है नए मकानों की आपूर्ति  
इस साल में नए मकानो की आपूर्ति में 44 फीसदी की तेजी आ सकती है। देश के शीर्ष सात शहरों में कुल 3.4 लाख यूनिट्स तैयार हो सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर तक सात शहरों में 2.65 लाख मकान लॉन्च हुए हैं। इनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बंगलूरू, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता हैं। चालू रुझान से पता चलता है कि नए मकानों की लॉन्चिंग में तेजी आएगी। 

दिल्ली-एनसीआर में 80 लाख रुपये से कम कीमत वाले मकानों की पसंद सबसे ज्यादा रही है। 2021 में एनसीआर में कुल 40,053 मकान बिके थे। 2017 से लेकर 2021 के दौरान कुल 1.58 लाख से ज्यादा मकान बनाए गए थे।  रिपोर्ट में कहा गया है कि सिग्नेचर ग्लोबल ने इन क्षेत्रों में अच्छा काम किया है। 2019 से 2021 के बीच इसकी हिस्सेदारी कुल मकानों में 9% रही है।

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