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आरबीआई: चालू खाते का घाटा कम होकर 9.2 अरब डॉलर के आंकड़े, कैड में 7.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

Fri, 29 Sep 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 29 Sep 2023 06:17 AM IST
सार

आरबीआई के बृहस्पतिवार के आंकड़ों के मुताबिक, तिमाही आधार पर कैड बढ़ने का कारण उच्च व्यापार घाटा, सेवा क्षेत्र में अधिशेष का कम होना और निजी हस्तांतरण प्राप्तियों में कमी है।

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Current account deficit reduced to 9.2 billion dollar CAD increased by 7.9 billion
आरबीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश का चालू खाते का घाटा (कैड) चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में सालाना आधार पर घटकर 9.2 अरब डॉलर रहा। यह जीडीपी का 1.1 फीसदी है। 2022-23 की पहली तिमाही में कैड 17.9 अरब डॉलर या जीडीपी का 2.1 फीसदी रहा था। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को बताने वाला कैड जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले 7.9 अरब डॉलर बढ़ा है। उस दौरान यह 1.3 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.2 फीसदी था।
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आरबीआई के बृहस्पतिवार के आंकड़ों के मुताबिक, तिमाही आधार पर कैड बढ़ने का कारण उच्च व्यापार घाटा, सेवा क्षेत्र में अधिशेष का कम होना और निजी हस्तांतरण प्राप्तियों में कमी है। कंप्यूटर, यात्रा व व्यापार सेवाओं के निर्यात में कमी से शुद्ध सेवा प्राप्ति तिमाही आधार पर घटी है। एजेंसी
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शुद्ध एफडीआई प्रवाह घटकर 5.1 अरब डॉलर
शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5.1 अरब डॉलर रह गया। एक साल पहले की समान तिमाही में यह 13.4 अरब डॉलर था। हालांकि, शुद्ध विदेशी पोर्टफोलियो निवेश 15.7 अरब डॉलर पहुंच गया। एक साल पहले 14.6 अरब डॉलर की निकासी हुई थी।
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24.4 अरब डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
आरबीआई के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भुगतान संतुलन आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार 24.4 अरब डॉलर बढ़ा। 2022-23 की पहली तिमाही में 4.6 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी। भारत का विदेशी कर्ज जून, 2023 अंत में तिमाही आधार पर करीब 4.7 अरब डॉलर बढ़कर 629.1 अरब डॉलर पहुंच गया। मार्च अंत में देश पर कुल 624.3 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था। हालांकि, कर्ज-जीडीपी अनुपात में गिरावट आई है। आरबीआई के मुताबिक, जून अंत में विदेशी कर्ज और जीडीपी का अनुपात घटकर 18.6 फीसदी रह गया। मार्च अंत में यह 18.8 फीसदी रहा था। विदेशी कर्ज में 32.9% की सबसे अधिक हिस्सेदारी ऋण की रही।


डॉलर में उछाल का मिला लाभ
येन व एसडीआर जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर में उछाल के कारण विदेशी कर्ज में मूल्यांकन प्रभाव 3.1 अरब डॉलर रहा। अगर इस प्रभाव को हटा दें तो मार्च के मुकाबले जून में भारत के कुल विदेशी कर्ज में 4.7 अरब डॉलर की जगह 7.8 अरब डॉलर की वृद्धि दिखती।
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