पूरे साल सहनी होगी महंगे कच्चे तेल की मार, आपूर्ति में कटौती रहने की संभावना
- ओपेक व सहयोगी देश तेल आपूर्ति में कटौती जून के बाद भी रख सकते हैं जारी
- 12 लाख बैरल तेल प्रतिदिन कटौती का फैसला किया था ओपेक और सहयोगी देशों ने
- 73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई क्रूड की कीमत मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में
विस्तार
ईरान से तेल आयात की छूट खत्म होने के बाद भारत को 2019 में पूरे साल महंगे क्रूड की मार सहनी पड़ सकती है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ने मंगलवार को कहा कि तेल उत्पादक देशों के समूह (ओपेक) और उसके सहयोगी देश उत्पादन में कटौती का सिलसिला पूरे साल जारी रख सकते हैं। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतों में नरमी की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फलीह ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति घटाने का तेल उत्पादक देशों का समझौता जून के बाद भी जारी रह सकता है। संभव है कि इसे 2019 के आखिर तक लागू रखा जाए। फलीह ने दो टूक शब्दों में कहा कि सऊदी अरब फिलहाल क्रूड उत्पादन में बढ़ोतरी करने नहीं जा रहा और वह इस कटौती को आगे भी जारी रखना चाहता है।
ओपेक और सहयोगी देशों ने क्रूड दाम में लगातार गिरावट के बाद मुनाफा बढ़ाने के लिए जनवरी में उत्पादन में कटौती का फैसला किया था। इसकी समय-सीमा जून 2019 रखी गई थी और 25-26 जून को होने वाली बैठक में इसे हटाने या जारी रखने पर चर्चा होनी है।
जून के बाद क्रूड उत्पादन बढ़ाने के सवाल पर फलीह ने कहा, हम वैश्विक मांग को पूरा करने और ईरान के तेल को कारोबार से हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन रियाद अभी उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं कर सकता है।
कम आपूर्ति बनेगा संकट
दुबई में स्टारफ्यूल्स के ब्रोकर मैट स्टेनली का कहना है कि 2019 में पूरे साल क्रूड की कीमतें बढ़ेंगी। इस दौरान मांग में इजाफा तो रहेगा लेकिन सबसे ज्यादा असर आपूर्ति में कटौती का होगा। मई के अंत तक सऊदी से होने वाली आपूर्ति वैश्विक अनुबंधों के मुकाबले घट जाएगी। यह 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर आ जाएगा। इसका असर क्रूड की वैश्विक कीमतों पर भी पड़ना तय है।
ट्रंप की अपील का असर नहीं
ईरान से तेल आयात की छूट खत्म करने के फैसलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओपेक और सहयोगी देशों से आपूर्ति बढ़ाने की अपील की थी। ईरान अभी तक 19 लाख बैरल तेल का प्रतिदिन आपूर्ति करता था, जिसके बंद होने से वैश्विक मांग के अनुरूप इसमें कमी आएगी। इस कमी को पूरा करने के लिए ट्रंप ने सऊदी अरब से भी तेल उत्पादन बढ़ाने को कहा था, जिस पर फलीह ने साफ इंकार किया है।
1 फीसदी तक उछले दाम
सऊदी ऊर्जा मंत्री के इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतें एक बार फिर उछलीं और तीन दिन से जारी नरमी का असर खत्म हो गया। पिछले शुक्रवार को ट्रंप की अपील से क्रूड 4 फीसदी सस्ता होकर 72 डॉलर के आसपास आ गया था, लेकिन मंगलवार को यह 1 फीसदी बढ़कर दोबारा 73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। पिछले क्रूड ने छह महीने का उच्च स्तर 75 डॉलर प्रति बैरल को छुआ था।