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क्रिसिल की रिपोर्ट: घरेलू मांग में सुधार और महंगाई घटने से खपत बढ़ेगी, जीडीपी को मिलेगी रफ्तार
Tue, 15 Apr 2025 01:09 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 15 Apr 2025 01:09 AM IST
सार
क्रिसिल की रिपोर्ट: घरेलू मांग में सुधार और महंगाई घटने से खपत बढ़ेगी, जीडीपी को मिलेगी रफ्तार
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जीडीपी में वृद्धि से अर्थशास्त्री उत्साहित
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सरकार के प्रयासों और कई सकारात्मक घटनाक्रमों की वजह से देश की घरेलू मांग में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। बीते वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में रबी फसलों के बेहतर उत्पादन एवं महंगाई में नरमी से खपत यानी उपभोग मांग में और वृद्धि की संभावना है। क्रिसिल ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा, कुल मिलाकर टैरिफ वार के कारण उपजी वैश्विक अनिश्चितता के बीच ये कारक घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने में मदद करेंगे।
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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2024-25 की दूसरी छमाही में पूंजीगत उत्पादों, बुनियादी ढांचे के सामान और निर्माण वस्तुओं के उत्पादन में बेहतर वृद्धि जैसे उच्च आवृत्ति संकेतक विकास की संभावनाओं को मजबूत बनाते हैं। जहां तक मांग में सुधार की बात है, तो इसमें विनिर्माण क्षेत्र में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के बेहतर प्रदर्शन का प्रमुख योगदान रहा है। दूसरी छमाही में विनिर्माण आईआईपी में मजबूत वृद्धि ने पेट्रोलियम उत्पादों, मशीनरी और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने में मदद की है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण गतिविधियों और कंपनियों की ओर से पूंजीगत खर्च में वृद्धि भी घरेलू मांग में सुधार की पुष्टि करते हैं। रबी फसलों का स्वस्थ उत्पादन और महंगाई में कमी समेत ये सभी संकेतक बताते हैं कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है।
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टैरिफ जैसे बाहरी जोखिम निर्यात के लिए बड़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से जवाबी टैरिफ लगाना भारत के विकास परिदृश्य के लिए चिंता का विषय है। धीमी वैश्विक वृद्धि और 90 दिन के बाद भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाले टैरिफ जैसे बाहरी जोखिम निर्यात एवं निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, जहां एक ओर अर्थव्यवस्था का घरेलू पक्ष सुधर रहा है, बाहरी जोखिम चुनौती बने हुए हैं।