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सुझाव: GDP में रियल एस्टेट का 53% योगदान; होम लोन के मूलधन-ब्याज पर बढ़े कटौती की सीमा, सस्ते मकानों पर हो जोर

Thu, 16 Jan 2025 06:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 16 Jan 2025 06:18 AM IST
सार

रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने इस क्षेत्र के समक्ष आने वाली गंभीर चुनौतियों के समाधान के लिहाज से आगामी बजट के लिए कई सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव और सस्ते मकान बनाने के लिए रियल एस्टेट कंपनियों को टैक्स के मोर्चे पर राहत देना भी शामिल है।

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CREDAI suggestion Increase limit of deduction on principal and interest of home loan in union Budget 2025
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

सरकार को सस्ते मकानों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक फरवरी को पेश होने वाले बजट-2025 में किफायती आवास योजनाओं पर आयकर की दर घटाकर सिर्फ 15 फीसदी कर देनी चाहिए। इसके अलावा, होम लोन पर चुकाए जाने वाले मूलधन और ब्याज पर कटौती की सीमा भी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

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रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने इस क्षेत्र के समक्ष आने वाली गंभीर चुनौतियों के समाधान के लिहाज से आगामी बजट के लिए कई सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव और सस्ते मकान बनाने के लिए रियल एस्टेट कंपनियों को टैक्स के मोर्चे पर राहत देना भी शामिल है।
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क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोमन ईरानी ने कहा, जीडीपी, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे में अपने योगदान के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र हमेशा राष्ट्र निर्माण में आगे रहा है। देश की जीडीपी में करीब 53 फीसदी योगदान करने वाले और आठ करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले इस क्षेत्र के पास उन 40 करोड़ भारतीयों की आवास जरूरतों का पूरा करने की कुंजी है, जिनके पास मकान नहीं है। सरकार अगर सुझावों पर ध्यान देती है तो इससे न सिर्फ जीडीपी को गति मिलेगी बल्कि मकान खरीदार सशक्त बनेंगे व देश की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन मिलेगा। अगले सात वर्षों में सात करोड़ मकान देने और दो करोड़ नए रोजगार सृजित करने के दृष्टिकोण भी सरकार को इन सुझावों पर विचार करना चाहिए।
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11 लाख करोड़ का खर्च लक्ष्य रखे सरकार : इक्रा
रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि सरकार को बजट में 11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का लक्ष्य रखना चाहिए।

  • इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान पूंजीगत खर्च 5.13 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो 11.11 लाख करोड़ के बजट अनुमान का 46 फीसदी है।
  • इसका मतलब है कि चालू वित्त वर्ष के बचे महीनों में ही सरकार को 54 फीसदी खर्च करना होगा।

रुपये की गिरावट थामने को बढ़ सकता है आयात शुल्क
ईवाई के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, कुछ महीनों में रुपये के मूल्य में आई गिरावट को रोकने के लिए बजट में आयात पर उच्च शुल्क लगाया जा सकता है। इससे आयातकों में डॉलर की मांग पर अंकुश लगेगा और रुपये के गिरते मूल्य को रोकने में मदद मिलेगी।

  • श्रीवास्तव ने कहा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में अचानक गिरावट राजकोषीय पक्ष पर बजट निर्माताओं और मौद्रिक पक्ष पर आरबीआई के लिए चुनौती बनने जा रही है। रुपया नवंबर से अब तक करीब 3 फीसदी टूट चुका है।
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