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क्रिप्टोकरेंसी पर वित्त मंत्री ने दिया बयान, कहा - इसे अपनाने से कतरा रहे हैं देश

Sun, 20 Oct 2019 03:28 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Sun, 20 Oct 2019 03:28 PM IST
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Countries have cautioned against rushing into cryptocurrencies says Nirmala Sitharaman
निर्मला सीतारमण - फोटो : Twitter

रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टोकरेंसी पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कई देश इसे अपनाने से कतरा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक के बाद सीतारमण ने ये बयान दिया। बैठक में फेसबुक की लिब्रा पर चर्चा चल रही थी। 

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आरबीआई गवर्नर ने भी दिया था बयान

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर बयान दिया था। वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआई के गवर्नर पहले ही इस बारे में बोल चुके हैं। कई देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को स्थिर मुद्रा की संज्ञा देने से भी इनकार कर दिया है। 

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IMF प्रमुख ने दी राय

इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आईएमएफ ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का कहना है कि डिजिटल मुद्रा के फायदे और इसके जोखिमों के बारे में चर्चा की जा रही है।

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क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है, जो कंप्यूटर एल्गोरिदम पर आधारित है। इसका इस्तेमाल शॉपिंग या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है। यह स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं है। सबसे पहले क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत 2009 में हुई थी और बिटकॉइन सबसे पहली क्रिप्टोकरेंसी थी। 

मुश्किल में फेसबुक की क्रिप्टोकरेंसी

फेसुबक ने कुछ महीने पहले अपनी डिजिटल करेंसी लिब्रा को पेश किया था। लिब्रा की घोषणा के दौरान भी काफी बवाल मचा था, क्योंकि भारत जैसे देशों में डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध है। वहीं अब फेसबुक के लिब्रा प्रोजेक्ट से उसके कई पार्टनर्स ने हाथ पीछे खींच लिया है। जिन कंपनियों ने फेसबुक के लिब्रा को बाय-बाय कहा है उनमें पेपाल, स्ट्राइप, वीजा, मास्टरकार्ड और ईबे जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का कहना है कि फेसबुक की डिजिटल करेंसी लिब्रा का समर्थन तो करती हैं लेकिन उसका हिस्सा बनना नहीं चाहती हैं।

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