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Telecom Sector: आम आदमी को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए, बोले- बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस
Sat, 28 Sep 2024 05:09 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 28 Sep 2024 05:09 PM IST
सार
Telecom Sector: न्यायमूर्ति उपाध्याय ने कहा कि चूंकि वकील और टीडीएसएटी के सदस्य इस क्षेत्र के नियमों, कानूनों और कानूनी बारीकियों से अच्छी तरह परिचित हैं, इसलिए उन्हें न्याय प्रदान करने के पुराने सिद्धांतों- समानता, निष्पक्षता और सदभावना के अनुसार लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए।
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दूरसंचार क्षेत्र
- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
आम आदमी को, फिर चाहे वह तमिलनाडु का ग्रामीण हो या गोवा का मोबाइल रिपेयर करने वाला, दूरसंचार के मामले में उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय ने शनिवार को यह टिप्पणी की।
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उन्होंने सुझाव दिया कि बार एसोसिएशन यह पहल करें ताकि आम जनता की शिकायतें दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) के समक्ष उठाई जा सकें। न्यायमूर्ति उपाध्याय उत्तरी गोवा में 'दूरसंचार और प्रसारण व साइबर क्षेत्रों में विवादों के समाधान के लिए तंत्र' विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। इस अवसर पर बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन जामदार, न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति नवीन चावला भी मौजूद थे।
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उन्होंने कहा, "जहां तक न्यायाधिकरण के समक्ष आने वाले मुद्दों पर निर्णय का सवाल है, इसके लिए कानून और नियम हैं। चूंकि विवादों की प्रकृति अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है, इसलिए न्यायाधिकरण भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में हैं और निरंतर विकसित हो रहे हैं।"
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न्यायमूर्ति उपाध्याय ने कहा कि चूंकि वकील और टीडीएसएटी के सदस्य इस क्षेत्र के नियमों, कानूनों और कानूनी बारीकियों से अच्छी तरह परिचित हैं, इसलिए उन्हें न्याय प्रदान करने के पुराने सिद्धांतों- समानता, निष्पक्षता और सदभावना के अनुसार लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यद्यपि अब यह भूमिका न्यायालय प्रणाली में भुला दी गई है, फिर भी मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि न्यायाधिकरण के सदस्य न्याय प्रदान करने के इन बुनियादी सिद्धांतों का पालन करें।"
न्यायमूर्ति उपाध्याय ने कहा कि टीडीसैट के समक्ष निर्णय के लिए आने वाले विवाद बहुत सारे मामलों से संबंधित हैं और वे तमिलनाडु के किसी गांव में बैठे किसी भी व्यक्ति या गोवा में मोबाइल मरम्मत की दुकान चलाने वाले व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "मोबाइल रिपेयर करने वाले को उसके अधिकारों के बारे में कैसे जागरूक किया जाए? मैं टेलीकॉम बार एसोसिएशन से अनुरोध करूंगा कि टीडीएसएटी के समक्ष आने वाले कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने के अलावा, शायद आपको देश के विभिन्न हिस्सों में बार एसोसिएशनों में जाकर इस पर चर्चा करनी चाहिए ताकि वे भी इस कानून के तहत अपने (जनता के) लिए उपलब्ध उपायों के बारे में खुद को जागरूक कर सकें।"
न्यायमूर्ति उपाध्याय ने कहा कि मोबाइल फोन मरम्मत की दुकान चलाने वाला एक साधारण व्यक्ति भी इन मंचों पर अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है, जिसके बारे में उसे अवश्य बताया जाना चाहिए ओर बार एसोसिएशनों की ओर से इस दिशा में एक प्रकार का जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए।