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Report: अगले दो दशकों तक कोयला ही भारत के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ रहेगा, आईआईएम की रिपोर्ट में दावा

Thu, 04 Apr 2024 09:13 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 04 Apr 2024 09:13 AM IST
सार

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा के बिना साल 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं होगा। 

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coal remain backbone of indian energy sector for two decades says iim report
कोयला उद्योग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोयला आने वाले दो दशकों तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ बना रहेगा। आईआईएम अहमदाबाद की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले के इस्तेमाल को कम करने के लिए सही नीतियां बनाने की जरूरत होगी। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा के बिना साल 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं होगा। 
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कोयला अभी भी बना रहेगा भारत के ऊर्जा क्षेत्र का केंद्र
आईआईएम अहमदाबाद ने नेट जीरो के लक्ष्य को पाने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और समन्वय पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। इस रिपोर्ट को भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कई गणमान्य लोगों जैसे नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. एके मोहंती और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जारी किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन नेट जीरो करना आसान नहीं है और इसके लिए कई रास्ते अपनाने पड़ेंगे। कोयले का इस्तेमाल अगले दो दशकों तक जारी रहेगा और यही भारत के ऊर्जा सेक्टर की रीढ़ बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2070 में भारत का कार्बन उत्सर्जन करीब 0.56 अरब टन कार्बन-डाई-ऑक्साइड से लेकर 1.0 अरब टन कार्बन डाई ऑक्साइड के बीच रहने की उम्मीद है। 
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सरकार ने साल 2021 में दी थी इस रिपोर्ट को तैयार करने की मंजूरी
रिपोर्ट को स्टडी प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है और इसकी मंजूरी नवंबर 2021 में सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार द्वारा दी गई थी। इस स्टडी की फंडिंग परमाणु ऊर्जा कॉरपोरेशन द्वारा की गई थी। प्रोफेसर अजय सूद ने इस रिपोर्ट की तारीफ की और बताया कि इससे भारत के ऊर्जा सेक्टर की पूरी तस्वीर पता चली है। वहीं डॉ. अनिल काकोदकर ने भी कहा कि भारत के ऊर्जा सेक्टर को इस तरह की स्टडी की जरूरत थी। 
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