खुशखबरः CNG-PNG,हवाई ईंधन हो सकता है सस्ता, जीएसटी परिषद में आ सकता है प्रस्ताव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देशवासियों को जल्द ही सस्ते हवाई ईंधन और सीएनजी-पीएनजी का तोहफा मिल सकता है। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में सरकार इसका एलान कर सकती है। फिलहाल पांच पेट्रोलियम उत्पाद हैं, जोकि जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।
लोगों को होगा फायदा
अगर जीएसटी काउंसिल ऐसा करती है तो फिरलोगों और हवाई कंपनियों को एक फिक्स टैक्स जीएसटी के तौर पर देना होगा। अभी इनके जीएसटी से बाहर होने के चलते लोगों और कंपनियों को ज्यादा पैसा देना पड़ता है।
वित्त मंत्रालय ने शुरू की तैयारी
फिलहाल वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को तैयार करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक अभी कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, हवाई ईंधन और प्राकृतिक गैस जीएसटी में नहीं आते हैं। इनमें से आखिरी दो वस्तुओं को जीएसटी में शामिल करने के लिए बैठक में एक प्रस्ताव लाया जा सकता है।
नई सरकार की पहली जीएसटी काउंसिल बैठक
नई सरकार के आने के बाद यह जीएसटी काउंसिल की पहली बैठक होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय पहले ही से इनको जीएसटी में लाने का प्रस्ताव दे चुका है। हालांकि रसोई गैस, केरोसिन और नेप्था को जीएसटी में पहले ही शामिल किया जा चुका है।
कंपनियों को होती है दिक्कत
तेल कंपनियों को फिलहाल काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टैक्स की गणना जीएसटी और पुराने वैट व बिक्री कर के जरिए होने से ऐसा होता है। वहीं कंपनियां टैक्स क्रेडिट को एक दूसरी जगह ट्रांसफर भी नहीं कर सकती है।
एक लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी संग्रह
पिछले वित्त वर्ष के मार्च माह में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। इस वित्त वर्ष की शुरुआत में जीएसटी संग्रह 1.13 लाख करोड़ रुपये था।
2018-19 में यह रहा मासिक संग्रह
मार्च में समाप्त वित्त वर्ष 2018- 19 के दौरान जीएसटी संग्रह अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये, मई में 94,016 करोड़ रुपये, जून में 95,610 करोड़ रुपये, जुलाई में 96,483 करोड़ रुपये, अगस्त में 93,960 करोड़ रुपये, सितंबर में 94,442 करोड़ रुपये, अक्टूबर में 1,00,710 करोड़ रुपये, नवंबर में 97,637 करोड़ रुपये, दिसंबर में 94,725 करोड़ रुपये, जनवरी 2019 में 1.02 लाख करोड़ रुपये और फरवरी 2019 में 97,247 करोड़ रुपये और आखिरी महीने मार्च में रिकार्ड 1.06 लाख करोड रुपये रहा है।
वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान, औसत मासिक जीएसटी संग्रह 98,114 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 9.2 फीसदी अधिक है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए उठाए गए कदमों से हाल के महीनों में जीएसटी राजस्व में तेजी आई है।
13.71 लाख करोड़ का है लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य 13.71 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 11.47 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। अब नये वित्त वर्ष 2019-20 के लिये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य 13.71 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।