ईरान की बड़ी गैस परियोजना से बाहर हुई चीन की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी
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ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजन नामदार जांगेनेह ने कहा है कि चीन की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी सीएनपीसी ने अपतटीय प्राकृतिक गैस क्षेत्र के एक हिस्से को विकसित करने के पांच अरब डॉलर यानी करीब 35 हजार करोड़ रुपये के सौदे से खुद को अलग कर लिया है। इस परियोजना की जिम्मेदारी अब ईरान की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी पेट्रोपार्स को मिली है।
साल 2015 में दुनिया के बड़े देशों के साथ समझौता हुआ था, जिसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को सीमित रखने के बदले में प्रतिबंधों से छूट दी गई थी। ईरान के साथ हुए समझौते में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन और रूस भी शामिल थे।
फ्रांस की पेट्रो कंपनी भी हुई थी परियोजना से बाहर
इसके बाद साल 2017 में चीन की सीएनपीसी, फ्रांस की पेट्रो कंपनी टोटल और पेट्रोपार्स के बीच इस गैस क्षेत्र को लेकर समझौता हुआ था। अब सीएनपीसी ईरान की बड़ी गैस परियोजना से बाहर हो गई है। मई 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग करते हुए ईरान पर फिर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसके तीन महीने बाद फ्रांस की पेट्रो कंपनी ने खुद को ईरान की परियोजना से बाहर कर लिया था।
सीएनपीसी परियोजना से क्यों बाहर हुई, इसका कोई कारण सामने नहीं आया है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से चीन की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी ने यह कदम उठाया है।
ईरान के तेल मंत्री ने दिया बयान
बता दें कि ईरान ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए दो टूक कहा कि वह अपना तेल निर्यात करने को लेकर किसी भी हद तक जाएगा। ईरान के तेल मंत्री बिजान जांगनेह ने रविवार को कहा कि तेल निर्यात करना हमारा वैध अधिकार है। हम अमेरिका के दबाव में झुकेंगे नहीं और तेल निर्यात को लेकर हरसंभव कदम उठाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में अमेरिका के प्रतिबंध लगाने के बाद ईरान के कच्चे तेल के निर्यात में 80 फीसदी की कमी आई है। अमेरिकी दबाव के कारण कई विदेशी निवेशक ईरान से दूर जा चुके हैं।
पिछले साल चीन की नेशनल पेट्रोलियम कॉर्प ने अमेरिका के दबाव के चलते दक्षिण पास की खाड़ी में निवेश करने से हाथ खींच लिए थे। जांगनेह ने कहा कि चीन के पीछे हटने के बाद पारस की खाड़ी में ईरान की कंपनी यह काम करेगी।