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China vs US: चीन ने अमेरिका पर दादागिरी करने का लगाया आरोप; कहा-टैरिफ का असर लेकिन 'कोई आसमान नहीं गिरेगा'
Mon, 07 Apr 2025 05:38 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 07 Apr 2025 05:38 PM IST
सार
China vs US: ट्रम्प ने बुधवार को अमेरिका में आयातित सभी चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त 34% टैरिफ की घोषणा की। मौजूदा टैरिफ लागू होने पर अमेरिका में सभी चीनी आयातों पर शुल्क 54% से अधिक हो जाएगा। जवाब में शुक्रवार को बीजिंग ने सभी अमेरिकी आयातों पर 34% टैरिफ का एलान कर दिया।
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डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दुनिया भर के देश पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से टैरिफ के एलान के बाद किसी संभावित समझौते की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, चीन का रुख थोड़ा अलग है। ट्रम्प की ओर से बाजार को प्रभावित करने वाले टैरिफ की घोषणा के 48 घंटे के भीतर ही, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने अमेरिकी वस्तुओं और कंपनियों पर दंडात्मक टैरिफ लागू कर जवाबी कार्रवाई की।
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चीन ने अब स्पष्ट संदेश दे दिया है कि व्यापार युद्ध का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चीन को समझनेवालों का मानना है कि वह इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से अधिक मजबूत होकर उभरेगा। चीन ने सोमवार को अमेरिका पर एकतरफावाद, संरक्षणवाद और टैरिफ के जरिए आर्थिक दादागिरी करने का आरोप लगाया। विदेश मामलों के प्रवक्ता लिन जियान ने संवाददाताओं से कहा, "अंतर्राष्ट्रीय नियमों के ऊपर अमेरिका को प्राथमिकता देना एकतरफावाद, संरक्षणवाद और आर्थिक दादागिरी का उदाहरण है।"
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ट्रम्प ने पिछले सप्ताह व्यापक टैरिफ की घोषणा की थी। चीन ने भी उसके जवाब में अमेरिका पर टैरिफ लगाने का एलान किया था। लिन ने कहा कि नये टैरिफ से वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति शृंखला की स्थिरता को नुकसान पहुंचा है। लिन के अनुसार इससे विश्व की आर्थिक सुधार पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
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चीन ने अमेरिकी टैरिफ की घोषणा के बाद अमेरिका के खिलाफ सख्ती से अपनी नाराजगी जाहिर की है। सप्ताहांत के दौरान सरकारी मीडिया कवरेज और बयानों के जरिए चीन ने अपना रुख अपने देशों के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए साफ कर दिया है। सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली में रविवार को प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा , "अमेरिकी टैरिफ का (चीन पर) प्रभाव पड़ेगा, लेकिन 'आसमान नहीं गिरेगा'।"
चीन की सरकार ने कहा, "जब से अमेरिका ने 2017 में (पहला) व्यापार युद्ध शुरू किया है- हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अमेरिका कैसे लड़ता है या दबाव डालता है- हमने विकास और प्रगति जारी रखी है, लचीलापन दिखाया है। जितना अधिक दबाव हम पर पड़ता है, हम उतने ही मजबूत होते हैं।"
ट्रम्प ने बुधवार को अमेरिका में आयातित सभी चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त 34% टैरिफ की घोषणा की। मौजूदा टैरिफ लागू होने पर अमेरिका में सभी चीनी आयातों पर शुल्क 54% से अधिक हो जाएगा। जवाब में शुक्रवार को बीजिंग ने सभी अमेरिकी आयातों पर 34% टैरिफ का एलान कर दिया। इसके साथ ही, चीन ने दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण और कुछ खास अमेरिकी कंपनियों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का भी एलान कर दिया।
बीजिंग लंबे समय से अमेरिकी टैरिफ को 'एकतरफा धौंस' बताकर इसकी आलोचना करता रहा है। इसकी ताजा बयानबाजी घरेलू स्तर पर संभावित घबराहट को शांत करने और बाकी दुनिया को भरोसा दिलाने के लिए भी हो सकती है। लेकिन चीन के रुख से इतना तो साफ है कि उनके नेता शी जिनपिंग और बीजिंग में उनके करीबी किस राणनीतिक गणना में लगे हुए हैं। वे ट्रम्प के टैरिफ का समाधान केवल बातचीत के जरिए न निकालकर दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि मौजूद टैरिफ संकट का चीन की तुलना में अमेरिका को अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वाशिंगटन स्थित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन थिंक टैंक के वरिष्ठ फेलो रयान हस ने चीन की यात्रा के दौरान सरकारी अधिकारियों, विद्वानों, व्यापार जगत के नेताओं के साथ बैठकों के बाद रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "कई (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) समकक्षों ने तर्क दिया है कि अमेरिका एक ऐसी गलती कर रहा है जो उसकी अपनी वैश्विक स्थिति को कमजोर करेगी।"
उन्होंने कहा, "इस बात पर बहस चल रही है कि क्या दुनिया गुटबाजी के नए दौर में प्रवेश कर रही है? क्या आगे का वैश्विकरण बिना अमेरिका के दखल के होगा? ऐसा लगता है कि बीजिंग दूसरे सवाल का जवाब तलाश रहा है। चीन के नेता अमेरिका को निष्क्रिय प्रतिक्रिया देना बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
चीन कैसे कर रहा अमेरिका से प्रतिस्पर्धा की तैयारी?
ट्रम्प के टैरिफ का निशाना अमेरिका के मित्र और शत्रु दोनों ही देश बने हैं। इस मौका फायदा उठाकर चीन आने वाले समय में खुद को वैश्विक बाजार के लिए एक वैकल्पिक चैंपियन और पूरी दुनिया के अर्थव्यवस्था के रक्षक के रूप में पेश करने पर विचार कर रहा है। वह यह संदेश देना चाहता है कि उसके बाद दुनिया के देशों की समृद्धि है। चीन दुनियाभर के देशों के सामने खुद को अमेरिका की तुलना में एक स्थिर आर्थिक साझेदार के रूप में भी पेश करना चाहता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा, "दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में, चीन बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की परवाह किए बिना अपने दरवाजे और अधिक खोलना जारी रखेगा।"
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, रविवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री लिंग जी टेस्ला और जीई हेल्थकेयर सहित 20 अमेरिकी वित्त पोषित उद्यमों के प्रतिनिधियों से मिले। लिंग ने चीन को निवेश के लिए एक 'आदर्श, सुरक्षित और आशाजनक' स्थान बताया। उन्होंने अमेरिकी व्यवसायों से 'तर्कसंगत आवाज बनने' और वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति शृंखलाओं की स्थिरता बनाए रखने के लिए 'व्यावहारिक कार्रवाई करने' का आह्वान किया। शनिवार को चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी से बात करते हुए आर्थिक विशेषज्ञों ने भी इस विचार को बल दिया कि व्यापार में यह बदलाव बीजिंग के लिए एक अवसर है।
चीन का संदेश- अमेरिका की धौंस-धमकी को बर्दाश्त नहीं कर सकते
चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय में चोंगयांग इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंस स्टडीज के वरिष्ठ शोधकर्ता लियू झिकिन ने प्रसारक को बताया, "चीन दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश भेज रहा है। वह संदेश यह है कि हम अमेरिका की धौंस-धमकी को बर्दाश्त नहीं कर सकते, क्योंकि सहनशीलता अंततः और अधिक धौंस-धमकी की आशंका को जन्म देती है।"
त्सिंगुआ विश्वविद्यालय के पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना स्कूल ऑफ फाइनेंस के प्रोफेसर जू जियानडोंग ने कहा, "चीन और अमेरिका अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को नया आकार देने में सीधे प्रतिद्वंद्वी हैं। हम चुनौती लेने के लिए तैयार हैं। हम नई वैश्विक व्यापार प्रणाली को फिर से परिभाषित करने में अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।"
हालांकि चीन के व्यापारिक साझेदार इस तरह के संदेश को बहुत गंभीरता से नहीं लेंगे। बीजिंग अपने विशाल बाजार तक पहुंच का इस्तेमाल देशों को मजबूर करने के लिए हथियार के रूप करता रहा है। अक्सर राजनीतिक रुख के कारण बीजिंग की नाराजगी बढ़ जाती है। कई देश सावधानी से इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या चीनी निर्यात उनके अपने बाजारों बढ़ने वाली है। क्या ऐसा होने से उनके अपने घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंचेगा या इसका असर उपभोक्ता कीमतों पर पड़ेगा।
लेकिन यदि अमेरिकी टैरिफ के दुष्प्रभावों को देखते हुए दुनिया के कई देशों के पास चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। पिछले महीने बीजिंग ने जापान और दक्षिण कोरिया के साथ आर्थिक वार्ता की है। इन देशों पर अमेरिका ने पिछले सप्ताह क्रमशः 24% और 25% टैरिफ लगाया गया है। चीन ने ही यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत की है जिस पर ट्रंप प्रशासन ने 20% शुल्क लगाया है।