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फैसला : 41 इकाइयों का रक्षा क्षेत्र की सात पीएसयू में निगमीकरण, जवाबदेही क्षमता बेहतर होगी
Wed, 29 Sep 2021 06:12 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 29 Sep 2021 06:12 AM IST
सार
उम्मीद है कि इस फैसले से आयुध आपूर्ति के क्षेत्र में स्वायतता, जवाबदेही और कार्य करने की क्षमता बेहतर होगी। रक्षा मंत्रालय द्वारा आदेश के मुताबिक, ओएफबी की 41 इकाइयों को रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सात पीएसयू में स्थानांतरित किया जाएगा।
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defence ministry
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय ने ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) को एक अक्तूबर से भंग कर दिया है। ओएफबी की संपत्ति, कर्मचारी और प्रबंधन को सरकारी क्षेत्र (पीएसयू) की सात कंपनियों में स्थानांतरित किया जाएगा। केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के तहत केंद्र सरकार ने ओएफबी के निगमीकरण का फैसला किया है।
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आदेश के अनुसार रक्षा क्षेत्र की सात पीएसयू में म्यूनिटियन इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड, एडवांस वेपन्स एंड इक्वीप्मेंट इंडिया लिमिटेड, ट्रूप कम्फर्ट लिमिटेड, यंत्रा इंडिया लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड और ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड शामिल हैं जिसमें ओएफबी का विलय होगा।
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क्या है ओएफबी
ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) रक्षा मंत्रालय का उपक्रम है जो भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ अर्धसैनिक बलों को हथियार और गोला बारूद मुहैया कराती है। रक्षा मंत्रालय ने ये भी स्पष्ट किया है कि और ओएफबी के उत्पादन यूनिटों से जुड़े समूह ए, बी और सी के कर्मचारियों के साथ गैर उत्पादन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों का भी नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाइयो (डीपीएसयू) में स्थानांतरण शुरुआती दौर में एक अक्तूबर 2021 से अगले दो वर्ष के लिए होगा। इसके लिए किसी कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति भत्ता नहीं दिया जाएगा।
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शोध में निवेश करें रक्षा क्षेत्र की कंपनियां- राजनाथ
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश की अपील की है। उन्होंने खासतौर पर साइबर स्पेस में कंपनियों से अधिक रूचि दिखाने की मांग की है।
सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के वार्षिक सत्र में रक्षामंत्री ने कहा, वैश्विक सुरक्षा मानदंडों में तेजी से बदलाव हो रहा है। इससे भविष्य में सैन्य उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी कंपनियों को काम करना होगा। भारतीय रक्षा उद्योग को बीते कुछ वर्षों में सरकार द्वारा नियमों में किए गए सुधार का लाभ उठाना होगा और घरेलू रक्षा उपकरण के उत्पादन पर जोर देना होगा।
भारत में अब अपार संभावनाएं
राजनाथ ने कहा, निजी क्षेत्र के पास आगे बढ़ने का पूरा मौका है। सरकार ने फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, पनडुब्बी और टैंक का निर्माण रणनीतिक साझेदारी मॉडल के जरिये हो रहा है। सरकार लगातार रक्षा क्षेत्र से जुड़ी घरेलू कंपनियों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। मालूम हो कि सरकारी रक्षा क्षेत्र में अपनी विदेशी निर्भरता को खत्म करना चाहती है। इसी कड़ी में 2025 तक सरकार ने रक्षा क्षेत्र में 1.75 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन लक्ष्य रखा है।